पश्चिम बंगाल में पिछले दशक के चुनावों में हिंसा बढ़ी है, जिसमें 64 प्रतिशत घटनाओं में TMC की भूमिका सामने आई है। बीजेपी के उभार के साथ राजनीतिक टकराव और तेज हुआ है। अगर हालात नहीं सुधरे तो इसका असर मतदान और जनता के भरोसे दोनों पर पड़ेगा।
West Bengal Election Violence: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल एक बार फिर हिंसा के आरोपों के बीच गरमा गया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही दिनों के भीतर कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसने पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। इसी बीच एक रिपोर्ट ने पिछले 10 सालों की तस्वीर पेश करते हुए बड़ा दावा किया है कि राज्य में हुई कुल चुनावी हिंसा की 64% घटनाओं में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की भूमिका रही है। यह आंकड़ा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ACLED की डेटा रिपोर्ट बताती है कि साल 2016 से लेकर 2026 तक बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा का ग्राफ लगातार ऊपर गया है। 2016 के विधानसभा चुनाव में 172 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2021 में बढ़कर 278 हो गईं। वहीं पंचायत चुनावों में 2018 की 155 घटनाएं 2023 में बढ़कर 327 तक पहुंच गईं। हाल ही में भी चुनाव की घोषणा के तीन दिन के भीतर छह हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से पांच मामलों में TMC कार्यकर्ताओं की भूमिका बताई गई, जिससे माहौल और ज्यादा गरमा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में TMC सबसे ज्यादा घटनाओं में शामिल रही और उस समय उसका मुख्य मुकाबला CPI-M से था। लेकिन 2018 के बाद तस्वीर बदलने लगी। भारतीय जनता पार्टी तेजी से उभरी और मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गई। साल 2021 के चुनाव में 278 घटनाओं में से 178 में TMC शामिल पाई गई, जबकि इन घटनाओं में सबसे ज्यादा निशाने पर BJP रही। पंचायत चुनाव 2023 में हिंसा का स्तर और बढ़ गया, हालांकि इसमें TMC की हमलावर भूमिका थोड़ी कम दिखी, लेकिन अलग-अलग दलों के बीच झड़पें बढ़ती रहीं।
बीजेपी की बंगाल में बढ़ती मौजूदगी का असर हिंसा के आंकड़ों में भी दिखा है। साल 2016 में जहां BJP सिर्फ 8 घटनाओं में शामिल थी, वहीं 2021 तक यह संख्या बढ़कर 125 हो गई। यह बदलाव बताता है कि राज्य की राजनीति में मुकाबला अब ज्यादा आक्रामक हो चुका है। वहीं, CPI-M की भूमिका धीरे-धीरे कम होती गई, लेकिन 2023 में कुछ हद तक उसकी मौजूदगी फिर नजर आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी, खासकर 2023 में ऐसे 90 से ज्यादा मामले सामने आए।
राज्य की 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 4 मई 2026 को नतीजे घोषित किए जाएंगे। ऐसे में बढ़ती हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आम मतदाता के मन में भी डर का माहौल बनता दिख रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं है।