राष्ट्रीय

बंगाल में 2019 में CAA के विरोध में हुई हिंसा की फाइलें खोलेगी शुभेन्दु सरकार, हर एक मदरसे का भी होगा सर्वे

West Bengal CAA Violence: बंगाल में सीएए के विरोध में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सीएम शुभेन्दु अधिकारी ने नए सिरे से जांच का आदेश दे दिया है।
2 min read
Jun 07, 2026
cm Suvendu Adhikari
सीएम शुभेन्दु अधिकारी (इमेज सोर्स: ANI)

Bengal Violence Investigation: पश्चिम बंगाल में नई सरकार ने वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान हुई हिंसा और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान के मामलों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि उस समय दर्ज सभी शिकायतों और मामलों की नए सिरे से जांच की जाए।

बता दें दिसंबर 2019 में CAA को लेकर राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। बसों को जलाने, रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस थानों पर हमले और लूटपाट के आरोप भी लगे थे। इनमें मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और हावड़ा के उलूबेरिया इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल थे।

जांच के लिए स्पेशल सेल का गठन

सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए राज्य पुलिस के भीतर एक विशेष सेल (स्पेशल सेल) बनाने का फैसला किया है। यह सेल पुराने रिकॉर्ड और शिकायतों की समीक्षा कर दोषियों की पहचान करेगी। जांच को तेज करने के लिए रेलवे पुलिस (GRP) का सहयोग भी लिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया जाता है, तो उससे नुकसान की भरपाई भी वसूली जाएगी। प्रशासन का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य कानून का पालन सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह बनाना है। सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के सभी मदरसों का सर्वे कराने का आदेश

यही नहीं शुभेन्दु सरकार ने राज्य के सभी मदरसों का सर्वे कराने का फैसला किया है। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के मदरसों की जांच कर 5 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट जमा करें।

सरकार का कहना है कि इस सर्वे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी मदरसे नियमों के अनुसार चल रहे हैं और उनके पास जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया का मकसद मदरसों का सही रिकॉर्ड तैयार करना और भविष्य की योजनाओं के लिए एक सटीक डेटाबेस बनाना है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मदरसों के पाठ्यक्रम या शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, जांच के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता या अवैध गतिविधि सामने आने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार सभी शैक्षणिक संस्थानों और मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर चुकी है।

Updated on:
07 Jun 2026 09:52 am
Published on:
07 Jun 2026 09:52 am