
Narendra Modi Cabinet Reshuffle: नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही है। हालांकि कैबिनेट में कब बदलाव होगा, इसको लेकर आधिकारिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के मानसून सत्र से पहले कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है। इसमें बागी सांसदों का नेतृत्व करने वाले नेताओं को इनाम मिल सकता है। वहीं नेताओं के विभाग बदले जा सकते है, जबकि कई नेताओं की छुट्टी भी हो सकती है। साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी की नई टीम में आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा को मौका मिल सकता है। दरअसल, AAP के 7 राज्य सभा सांसदों के बीजेपी में विलय करने का राघव चड्ढा ने नेतृत्व किया था। राघव चड्ढा पंजाब से राज्य सभा सांसद है। वहीं पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने है। ऐसे में राघव चड्ढा को मोदी कैबिनेट में जगह देकर बीजेपी आगामी चुनाव में फायदा उठा सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा जिन नए नामों पर चर्चा चल रही है, उसमें महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे का भी है। दरअसल, उद्धव गुट के 6 सांसदों को श्रीकांत शिंदे ही एनडीए में लाए है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए सुखेंदु शेकर, सुदीप बंदोपाध्याय और शर्मिला सरकार को भी जगह मिल सकती है।
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं किया था। संसद में एनडीए के बहुमत में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी का अहम रोल है। लोकसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू के 16 सांसद जीतकर संसद पहुंचे थे। ऐसे में अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल के बाद एक बार फिर टीडीपी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। टीडीपी की प्राथमिकता क्या है?
टीडीपी की रणनीति ज्यादा मंत्रालय के बजाय ज्यादा विकास पैकेज हासिल करने की रही है। यही कारण है कि पार्टी केंद्र सरकार के साथ टकराव के बजाय सहयोग की राजनीति करती दिखाई दे रही है।
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में आंध्र प्रदेश के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की है…
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू की रणनीति तीन बिंदुओं पर केंद्रित है। पहला- आंध्र प्रदेश के लिए अधिक से अधिक केंद्रीय वित्तीय सहायता लेना। दूसरा- एनडीए में अपना प्रभाव बनाए रखते हुए केंद्र के साथ टकराव से बचना है। जिससे राज्य को लगातार निवेशऔर विकास योजनाओं का लाभ मिलता रहे। तीसरा- अमरावती राजधानी परियोजना और पोलावरम जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराना।