
Jantar Mantar Protest: दिल्ली का जंतर-मंतर इस वक्त एक अजीबोगरीब सियासी ड्रामे और विरोध प्रदर्शन का गवाह बना हुआ है। एक तरफ जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक नीट (NEET) पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 11 दिनों से कड़े अनशन पर हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके साथी और सोशल मीडिया से चर्चा में रहने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके घिर गए हैं।
इंटरनेट पर कुछ ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें एक तरफ अनशन के कारण कमजोर हो चुके सोनम वांगचुक का गिरता वजन दिख रहा है, तो दूसरी तरफ अभिजीत दीपके ब्रेड-पकौड़े और तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लेते नजर आ रहे हैं। इस विरोधाभास ने सोशल मीडिया यूजर्स को गुस्सा दिला दिया है और लोग पूछ रहे हैं कि भाई, नेताजी भूखे हैं तो चमचे ठूंस क्यों रहे हैं?
अब इस पूरे विवाद पर खुद अभिजीत दीपके सामने आए हैं और उन्होंने रोते-बिलखते हुए नहीं, बल्कि सटीक अंदाज में अपनी सफाई दी है। दीपके का कहना है कि यह उन्हें बदनाम करने और मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश है। एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि जो वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, वे पुराने हैं।
दीपके ने कहा कि जब वो वीडियो शूट हुआ था, तब सोनम सर यूरोप में एक क्लाइमेट समिट में थे और उन्होंने अपनी भूख हड़ताल शुरू भी नहीं की थी। हम लोग पहले से जंतर-मंतर पर बैठे थे। पुरानी क्लिप्स को आज के अनशन के साथ जोड़कर (क्लब करके) प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है।
इस सवाल का जवाब देते हुए सीजेपी फाउंडर ने एक नया लॉजिक सामने रखा है। उनका कहना है कि वे अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि खुद सोनम वांगचुक के आदेश पर खाना-पीना जारी रखे हुए हैं। दीपके के मुताबिक, सोनम सर ने कोर टीम को साफ निर्देश दिया है कि सबको भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं है। अगर पूरी लीडरशिप ही भूखी बैठ जाएगी और बीमार हो जाएगी, तो इस पूरे आंदोलन को मैनेज कौन करेगा? जंतर-मंतर पर रोजाना सैकड़ों लोग आ रहे हैं, पल-पल पर पुलिस से अनुमति लेने और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए उलझना पड़ता है। ऐसे में किसी का होश में और ताकत में रहना जरूरी है।
दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद को हवा खुद सोनम वांगचुक के एक बयान से मिली थी। वांगचुक ने हाल ही में मंच से नाराजगी जताते हुए कहा था कि कुछ लोग यहां आकर ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं। जंतर-मंतर पर सीजेपी के पंडाल में सुबह-शाम तरह-तरह के लजीज व्यंजन बांटे जा रहे हैं, जिसे लेकर आंदोलन के गंभीर होने पर ही सवाल उठने लगे हैं।