
CJP Protest: 20 जुलाई को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का मामला एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब इस मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उस दिन हालात अचानक बिगड़े थे या हिंसा के पीछे पहले से कोई तैयारी थी।
क्राइम ब्रांच ने BNS की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब उन लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी, जिन पर हिंसा में शामिल होने का शक है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि प्रदर्शन के दौरान आपराधिक मामलों वाले कुछ लोग भी भीड़ में शामिल हुए थे या नहीं।
जांच सिर्फ हिंसा में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहेगी। क्राइम ब्रांच प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमले, बैरिकेड तोड़ने और तोड़फोड़ की घटनाओं की भी जांच करेगी।
सरकारी संपत्ति और पुलिस की गाड़ियों को हुए नुकसान को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 20 जुलाई से जुड़े 17 FIR सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रद्द किए जा चुके हैं, तो फिर क्राइम ब्रांच जांच क्यों कर रही है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े कई मामलों को खत्म करने का रास्ता साफ किया था, लेकिन गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को इससे अलग रखा गया था। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में 2,873 ऐसे लोगों का भी जिक्र किया था, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड होने का दावा किया गया था। इन लोगों को लेकर अलग जांच की बात सामने आई थी।
क्राइम ब्रांच की जांच में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि 20 जुलाई की हिंसा अचानक हुई थी या इसके पीछे पहले से कोई योजना थी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या आपराधिक मामलों वाले कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल हुए और क्या उनकी वजह से हालात बिगड़े।
जांच आगे बढ़ने के बाद ही साफ होगा कि उस दिन हुई हिंसा में किन लोगों की क्या भूमिका थी। फिलहाल क्राइम ब्रांच इसी से जुड़े सबूत और जानकारी जुटा रही है।