नई दिल्ली

उस्तरे से काटी थी कलाइयां, DU प्रोफेसर हत्याकांड में 1400 KM दूर से आए किरायेदारों ने इस तरह रची थी साजिश

Debosmita Paul Case Update: दिल्ली यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड की परतें खुल चुकी हैं। हत्या के पीछे कारण और किस तरह प्लानिंग की गई थी, पुलिस जांच में खुलासा हो गया है।

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Debosmita Paul Murder Mystery
DU प्रोफेसर हत्याकांड की पूरी कहानी आई सामने

Debosmita Paul Murder Mystery: दिल्ली यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में पश्चिम बंगाल से एक दंपती को गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि हत्या के पीछे पैतृक संपत्ति का विवाद था। आरोपियों का परिवार लंबे समय से प्रोफेसर के पुश्तैनी मकान में किराए पर रह रहा था और मकान खाली करने के दबाव के चलते उन्होंने यह खौफनाक साजिश रची। पुलिस जांच में अब यह भी सामने आ चुका है कि किस तरह दंपती ने महीनों की नाराजगी के चलते इस हत्याकांड के लिए पूरी प्लानिंग की थी। साथ ही गिरफ्तारी पर हत्या के दौरान कलाइयों काटने में इस्तेमाल किए गए उस्तरे के साथ कई जरूरी सबूत बरामद किए गए हैं।

जब प्रोफेसर का शव बरामद किया गया था तो उनके सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और दोनों हाथों की कलाइयां भी कटी हुई मिलीं थी। चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर चोटों के निशान है।

किरायेदार से दुश्मन बने आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपी परिवार साल 2023 से देबोस्मिता के बर्धमान के घर में रह रहे थे। यह घर पारिवारिक बंटवारे के बाद देबोस्मिता पॉल के हिस्से में आया था। इस घर को दंपती खरीदने की कोशिश कर रहा था, लेकिन देबोस्मिता इसके लिए राजी नहीं थी। वहीं प्रोफेसर लगातार मकान खाली करने का दबाव बना रही थीं। हाल ही में उन्होंने अंतिम बार घर खाली करने की चेतावनी दी थी। इसी के बाद आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि हत्या की पूरी साजिश पहले से तैयार की गई थी और इसी मकसद से आरोपी 1400 किमी दूर दिल्ली आए थे।

पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा

दिल्ली पहुंचने के बाद आरोपियों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए अपनी असली पहचान छिपाई। वे चिल्ला गांव और दल्लूपुरा क्षेत्र के एक गेस्ट हाउस में रुके, जहां उन्होंने दूसरे लोगों के नाम पर बने आधार कार्ड दिखाए। जांच में सामने आया कि जिन पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया गया, उनका आरोपियों से कोई संबंध नहीं था।

सीसीटीवी फुटेज से खुली परतें

इस केस को सुलझाने के लिए पुलिस ने सोसाइटी के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाले। मामले में 200 लोगों को जांच में दायरे में लिया गया लेकिन बाद में प्रक्रिया आगे बढ़ने पर 13 लोगों को शक के दायरे में रखा गया। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तीन संदिग्ध लोग ऐसे थे जिनकी पुलिस पहचान नहीं कर पाई थी। उसके बाद पुलिस की स्पेशल टीमों ने रेलवे स्टेशन और गेस्ट हाउस के फुटेज खंगाले, जिससे आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ।

जान-पहचान होने की वजह से आसानी से घर में घुसे

जांच में पता चला कि आरोपी पहले से देबोस्मिता पॉल को जानते थे। इसी वजह से उन्हें घर के अंदर जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। घटना वाले दिन उन्होंने अपना चेहरा ढक रखा था। वे लिफ्ट और सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हुए फ्लैट तक पहुंचे। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर ने उन्हें पहचानकर ही दरवाजा खोला था। घर में घुसने के बाद आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया और वारदात को अंजाम दे दिया।

हत्या के बाद भागे

हत्या करने के बाद आरोपियों ने अपने कपड़े बदल लिए ताकि उन पर किसी को शक न हो। इसके बाद वे वहां से निकल गए। पहले टैक्सी ली, फिर ऑटो से आनंद विहार पहुंचे। वहां से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन गए और ट्रेन पकड़कर पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो गए। पुलिस का कहना है कि भागने का पूरा प्लान पहले से तैयार था।

बर्धमान से गिरफ्तारी

सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर दिल्ली पुलिस पश्चिम बंगाल के बर्धमान पहुंची। कई घंटों की तलाश के बाद 7 जून को दंपती और उनके नाबालिग बेटे को पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने प्रोफेसर का मोबाइल फोन, हत्या में इस्तेमाल किया गया उस्तरा, कपड़े, टोपी, बैग और ट्रेन टिकट समेत कई जरूरी सबूत बरामद किए। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में इन दोनों के अलावा कोई और भी शामिल था या नहीं।

Published on:
08 Jun 2026 08:53 am