नई दिल्ली

NSUI की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार और सीबीएसई को भेजा नोटिस

एनएसयूआई के प्रमुख विनोद जाखड़ द्वारा दायर की गई याचिका में मुख्य रूप से CBSE बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में खामियां है।

2 min read
Delhi High Court CBSE On Screen Marking
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर उठे सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और बोर्ड को भेजा नोटिस (Photo: ANI)

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। अदालत ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी।

सोमवार को जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की वेकेशन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और तकनीकी खामियां हैं, जिससे छात्रों के मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

NSUI ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर जताई चिंता

यह याचिका एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से 29 मई को दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई को ओएसएम प्रणाली को लेकर बार-बार सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करने पड़े हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर संदेह पैदा हुआ है।

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि जिन छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी या मूल्यांकन प्रक्रिया पर आपत्ति है, उन्हें मैन्युअल री-चेकिंग और उत्तर पुस्तिकाओं के भौतिक सत्यापन का मौका दिया जाए।

CBSE ने याचिका पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान सीबीएसई के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि याचिका एक राजनीतिक संगठन के छात्र विंग द्वारा दायर की गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

हालांकि, एनएसयूआई की ओर से पेश वकील ने जवाब देते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव होने का मतलब यह नहीं है कि संगठन छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता।

‘छात्रों को भुगतने के लिए मजबूर नहीं कर सकते’

याचिका में कहा गया है कि यदि मूल्यांकन प्रणाली में कोई तकनीकी खामी या कमी है तो उसका नुकसान छात्रों को नहीं उठाने दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रशासन द्वारा लागू की गई प्रणाली की खामियों की वजह से छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल के वर्षों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को अधिक तेज और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की है। इस प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर परीक्षकों द्वारा जांचा जाता है और वहीं अंक दिया जाता है। हालांकि, अब इस प्रणाली की सटीकता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस याचिका के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब 12 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।

Published on:
09 Jun 2026 08:31 am