नई दिल्ली

दिल्ली तुगलकाबाद अग्निकांड: ‘अब मोनी को बताना होगा कि उसके मां, भाई और बहन नहीं रहे’, हादसे के बाद मोनी के ताऊ का छलका दर्द

Tughlaqabad Fire Tragedy: दिल्ली के तुगलकाबाद में हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

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Delhi Tughlaqabad Fire
दिल्ली तुगलकाबाद अग्निंकाड (Photo-IANS)

Delhi Tughlaqabad Fire: 12 जून को दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में लगी भीषण आग ने कई लोगों की जान ले ली और बहुत से लोग घायल हुए। पार्किंग में लगी आग ने देखते ही देखते छह मंजिला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना रात करीब दो बजे हुई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। इस हादसे से एक बहुत दर्दनाक कहानी भी सामने आई है। दरअसल, इस आग ने एक ऐसे परिवार को उजाड़ दिया, जिसने पहले ही कई मुश्किलों का सामना किया था। दो साल पहले कैंसर के कारण मोनी के पिता की मौत हो गई थी और अब इस हादसे में उसने अपने मां, भाई और बहन को भी खो दिया है।

अकेली रह गई मोनी

दो साल पहले मृतक परिवार के मुखिया सुभाष की मौत होने के बाद मोनी, मां गुड्डी, भाई पंकज और बहन सोनी के साथ तुगलकाबाद की गली नंबर 1 में एक तीसरी मंजिल के किराए के फ्लैट में रहने लगी थी। परिवार पहले रेलवे कॉलोनी में सुभाष के बड़े भाई सुरेश के साथ रहता था, लेकिन ज्यादा जगह की जरूरत होने के कारण वे अलग मकान में शिफ्ट हो गए थे। जानकारी के अनुसार पंकज एक मोबाइल रिपेयर की दुकान पर काम करता था और सोनी एक बुटीक में नौकरी करती थी।

ताऊ का छलका दर्द

हादसे में जान गंवाने वाले पंकज और सोनी अपने परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन चुके थे। उनके ताऊ सुरेश ने बताया कि दोनों भाई-बहन घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। पंकज को हाल ही में नई नौकरी मिली थी। दोनों अपनी मां के इलाज का खर्च उठाने के साथ-साथ छोटी बहन मोनी की पढ़ाई में भी मदद कर रहे थे । सुरेश ने बताया कि रात करीब तीन बजे उन्हें हादसे की सूचना मिली थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि मोनी अभी भी होस्पिटल में है और अब उसे बताना होगा कि उसके मां, भाई और बहन अब नहीं रहे।

पड़ोसियों ने दिखाया साहस

आग लगने के बाद आसपास रहने वाले लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाने की कोशिश की। कुछ पड़ोसी अपनी जान की परवाह किए बिना मदद के लिए आगे आए। किसी ने सीढ़ियां जोड़कर बिल्डिंग की छत तक पहुंचने का रास्ता बनाया तो किसी ने पानी डालकर धुएं को कम करने की कोशिश की। वहीं कुछ लोगों को साड़ियों की मदद से बिल्डिंग से नीचे उतारा गया। लोगों की समझदारी और बहादुरी की वजह से कई लोग समय रहते बाहर निकल पाए।

Published on:
13 Jun 2026 09:33 am