
नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह संसद में सार्थक चर्चा से बचने के लिए विरोध और हंगामे का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की मंशा बहस करने की नहीं, बल्कि सदन की कार्यवाही बाधित करने की है।
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने कहा कि सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष चाहे तो सदन में आए, अपनी बात रखे और लोकतांत्रिक तरीके से बहस करे, लेकिन उसका उद्देश्य चर्चा करना नहीं, बल्कि संसद की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना है।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि देश की जनता अपने जनप्रतिनिधियों को संसद में जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा और समाधान निकालने के लिए चुनकर भेजती है। ऐसे में सदन को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सत्ता की राजनीति का मंच बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के विपरीत है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस का वर्तमान रवैया संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी कमजोर करने का प्रयास है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर शेखावत ने सोशल मीडिया पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब-जब राहुल गांधी के तर्क खत्म होते हैं, तब-तब उनकी कहानियों में नए-नए अदृश्य किरदार सामने आ जाते हैं। शेखावत ने कहा कि विपक्ष में बैठने से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर देश को गुमराह करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। विपक्ष के नेता को क्या यह सत्य नहीं पता है कि कांग्रेस ने ही पेपर लीक की समस्या को पनपाया और इसकी जड़ों को गहरा किया। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के दौरान लगातार सामने आए पेपर लीक के प्रकरण इस विफलता की खुली गवाही हैं।
सोशल मीडिया पर शेखावत ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती रहीं, जबकि पीएम मोदी की सरकार ने शोर-शराबे के बजाय कार्रवाई का रास्ता चुना है। कड़े कानून बनाए, व्यवस्था को मजबूत किया और अब फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया है। सवाल पूछने के लिए संसद से बड़ा कोई मंच नहीं है। सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बहस से भागकर उपद्रव की राजनीति को चुना। ‘भारत के भविष्य’ के साथ राजनीति करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि युवाओं को नारे नहीं, निष्पक्ष परीक्षाएं और न्याय चाहिए।