
Delhi Malviya Nagar hotel fire: दिल्ली के हौजरानी इलाके में लगी आग में अपने साथियों की जान बचाने वाले 32 साल के रोहित आज खुद ही दूसरों की मदद के मोहताज हो गए हैं। रोहित ने अपने साथ काम करने वाले दो साथी राज और कुंदन की जान तो बचा ली है लेकिन खुद की रक्षा नहीं कर सके। बढ़ती आग और तेज लपटों को देखते हुए उन्होंने होटल की पहली मंजिल से छलांग लगी दी थी, जिसके कारण रोहित की कमर टूट गई। डॉक्टरों ने उनकी कमर में दो रॉड डाली हैं। अब उनको चलने-फिरने के लिए भी दूसरे का सहारा लेना पड़ रहा। परिवार के लिए भी मुसीबत खड़ी हो गई है कि दो वक्त की रोटी कहां से लेकर आएं। मूलरूप से बिहार के रहने वाले रोहित परिवार के साथ खिड़की एक्सटेंशन में किराए के मकान में रहते हैं। परिवार में पत्नी लक्ष्मी, बहन रेनू और दो बेटे आदर्श (13) और ओम (9) हैं। रोहित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में दो साल से काम कर रहे थे। रोहित का कहना है कि सरकार सबकी मदद कर रही है, मैं चाहता हूं कि दो वक्त की रोटी मेरे बच्चों को मिल जाए बस। मैं ठीक होता तो कभी मदद नही मांगता।
रोहित ने बताया की हादसे के समय वो फ्लोरिश स्टे बीएंडबी होटल के किचन में बर्तन धो रहे था। उसी वक्त शेफ केसर सिंह ने जैसे ही एयर फ्रायर चालू किया अचानक उसमें से आग की लपटे निकलने लगी और तेजी से फैलने के कारण चारों तरह धुंआ ही धुंआ हो गया। तभी वहां मौजूद मैनेजर रूपेश नेे मुझे तुरंत पहली मंजिल से भागकर गीला तौलिया लेकर आने को कह दिया। उन्होंने मैनेजर के साथ मिलकर फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आग बेहद तेजी से फैलती चली गई।
आग की लपटों को बढता देख रोहित को याद आया कि उनके दो साथ काम करने वाले राज और कुंदन पहली मंजिल के एक कमरे में हैं वहां बिस्तर ठीक कर रहे हैं। रोहित उन्हें बचाने के लिए ऊपर पहुंच गए, लेकिन तब तक पूरे फ्लोर में दम घोंटू काला धुआं भर चुका था और नीचे उतरने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। मौत को सामने देख रोहित बाथरूम की तरफ भागा और वहां की खिड़की का मजबूत शीशा बाल्टी मारकर तोड़ दिया। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए पहले राज और कुंदन को नीचे कूदने के लिए कहा और दोनों की जान सुरक्षित बचा ली।
बिहार के रहने वाले रोहित अपने परिवार पत्नी लक्ष्मी, बहन रेनू और दो बेटों आदर्श व ओम के साथ खिड़की एक्सटेंशन में किराये के मकान में रहते हैं। रोहित ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके अपाहिज होकर बिस्तर पर गिरने के बाद पत्नी लक्ष्मी को उनकी चौबीस घंटे देखभाल करने के लिए घरों में साफ-सफाई की अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके कारण परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा और उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई।