
Jantar Mantar Protest Latest News:दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अब जांच का दायरा बढ़ा दिया है। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प, चोट और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस ने 15 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, पुलिस अब तकनीक की मदद से प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगाए गए फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों के जरिए अब तक 2 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस इन लोगों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसके प्रदर्शन के दौरान शामिल होने और किसी तरह की गड़बड़ी में भूमिका की पुष्टि की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक का मकसद आम लोगों पर नजर रखना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की पहचान करना है जो कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, बड़े धार्मिक आयोजनों और राजधानी के अन्य भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों में किया जा चुका है। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध लोगों की पहचान करने में मदद मिलती है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान रोजाना औसतन करीब 10 हजार लोगों की आवाजाही बनी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि बड़ी भीड़ वाले आयोजनों में तकनीक की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाता है।
दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर ‘संसद चलो’ मार्च निकालने की कोशिश की थी। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और बैरिकेड लगाए गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के मुताबिक, स्थिति संभालने के दौरान दोनों तरफ के लोग घायल हुए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस घटना में करीब 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल हुए हैं।
प्रदर्शन के दौरान हुए हंगामे के बाद संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम कानून (PDPP Act) की धाराएं शामिल हैं।
वहीं, पुलिस की ओर से 2 हजार से ज्यादा आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान किए जाने के दावे पर प्रदर्शनकारी संगठन ने सवाल उठाए हैं। CJP प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और कार्यकर्ताओं के साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि संगठन भी उन पुलिसकर्मियों की जानकारी जुटाएगा, जिन पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के आरोप हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि एफआरएस तकनीक का इस्तेमाल केवल पहचान और जांच में मदद के लिए किया जा रहा है, जबकि किसी भी कार्रवाई का आधार जांच में मिले सबूत होंगे।