नई दिल्ली

दिल्ली अग्निकांड की दर्दनाक कहानी: वॉशरूम में पति-पत्नी गले लगकर रेसक्यू का करते रहे इंतजार, परिवार के 8 लोगों की हुई मौत

Delhi Hauz Rani Fire: दक्षिण दिल्ली के हौज रानी के गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वॉशरूम में मिले पति-पत्नी और एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत की दर्दनाक कहानी सामने आई है।

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Malviya Nagar Fire Incident
दिल्ली अग्निकांड की दर्दनाक कहानी (Photo-IANS)

Malviya Nagar Fire Incident: 3 जून को हुए दक्षिण दिल्ली के हौज रानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की जान चली गई है। इस हादसे के बाद सामने आ रही कुछ कहानियां झकझोर कर रख दे रही हैं। रेस्कयू ऑपरेशन के दौरान पहली मंजिल के एक बंद वॉशरूम में पति-पत्नी के शव मिले। उन दोनों आग से बचने के लिए वॉशरूम में खुद को बंद किया था। उन्हें उम्मीद थी कि शायद मदद पहुंच जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और अंत में दोनों धुएं के बीच दोनों की मौत हो गई। वहीं बताया जा रहा है कि एक ही परिवार के आठ सदस्यों की इस अग्निकांड में मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान बेटे ने अपने रिश्तेदार को आखिरी बार फोन किया था और वह सिर्फ इतना कह पाया था कि यहां आग लग गई है।

वॉशरूम में बंद होकर की थी बचने की कोशिश

बचाव अभियान के दौरान दमकलकर्मियों को पहली मंजिल के एक बंद वॉशरूम में पति-पत्नी के शव मिले। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग और धुएं से बचने के लिए दोनों वॉशरूम में जाकर बंद हो गए थे। जब राहत टीम वहां पहुंची तो महिला टॉयलेट सीट पर बैठी हुई थी और उसका पति उसके पास कुर्सी पर बैठा मिला। दोनों एक दूसरे को गले लगाए हुए थे। माना जा रहा है कि दोनों को उम्मीद थी कि कुछ ही देर में मदद पहुंच जाएगी, लेकिन धुआं तेजी से फैलता गया और उनकी जान नहीं बच सकी।

पिता के इलाज के लिए परिवार आया था दिल्ली

जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम का रहने वाले विवेक अग्रवाल अपने परिवार के साथ दिल्ली आए हुए थे। उनके पिता राधेश्याम अग्रवाल साकेत के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती थे और उनकी तबीयत काफी खराब बताई जा रही थी। पूरा परिवार हॉस्पिटल के पास रहने के लिए हौज रानी स्थित गेस्ट हाउस में ठहरा हुआ था। विवेक अपनी मां, पत्नी और दोनों बेटियों के साथ गेस्टहाउस में रुके हुए थे और साथ ही कुछ और भी करीबी रिश्तेदार गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान विवेक ने घबराकर अपने एक रिश्तेदार को फोन किया और सिर्फ इतना कहा क्हा कि आग लग गई है। यह बातचीत कुछ ही सेकंड की थी और उसके बाद दोबारा संपर्क नहीं हो पाया।

घंटों तक अपनों की तलाश में भटकते रहे रिश्तेदार

आग की खबर मिलते ही परिवार के लोग अलग-अलग अस्पतालों और शवगृहों के चक्कर लगाने लगे। कई घंटों तक किसी को अपने परिजनों के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं मिल सकी। शाम होते-होते विवेक अग्रवाल, उनकी मां, पत्नी और दोनों बेटियों समेत परिवार के कुल आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो गई। इनमें उनके मामा और बाकी करीबी रिश्तेदार भी शामिल थे। यह खबर सुनते ही पूरे परिवार में मातम छा गया था।

लोगों को नहीं मिला था बाहर निकलने का मौका

दमकलकर्मियों ने बताया कि इस हादसे में आग से ज्यादा खतरनाक धुआं साबित हुआ। आग लगने के कुछ ही देर बाद पूरी बिल्डिंग में इतना धुआं भर गया कि लोगों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं दिखाई दे रहा था। सीढ़ियां और गलियारे धुएं से भर गए थे, जिससे कई लोग अपने कमरों में ही फंस गए। कुछ लोग धुएं से बेहोश हो गए और कुछ लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं, बेसमेंट में भी लोग फंसे हुए थे, वहां तक पहुंचने के लिए दमकलकर्मियों को पहले शटर काटना पड़ा। कई लोगों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक काफी लोग धुएं की चपेट में आ चुके थे।

Updated on:
04 Jun 2026 09:02 am
Published on:
04 Jun 2026 08:53 am