
John Brittas: संसद के भीतर नेताओं के बीच तीखी बहस होना आम बात है, लेकिन जब बात किसी के पहनावे, भाषा या संस्कृति पर आ जाए तो मामला बिगड़ जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा राज्यसभा में देखने को मिला, जब सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने भारी मन से एक बड़ा मुद्दा उठाया। ब्रिटास ने आरोप लगाया कि जब वे सदन में अपनी बात रख रहे थे, तब एक महिला सांसद ने उन्हें बार-बार 'लुंगी वाला, लुंगी वाला' कहकर चिढ़ाया। ब्रिटास ने इस टिप्पणी पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके सम्मान की बात नहीं है, बल्कि देश की बहुरंगी संस्कृति, क्षेत्रीय पहचान और पूरी संसद का अपमान बताया है। इस संवेदनशील बयान के बाद सरकार से लेकर सभापति तक को इस मामले में तुरंत दखल देना पड़ा।
संसद की कार्यवाही के दौरान जब सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास वैधानिक प्रस्ताव पर अपनी बात रख रहे थे, तब एक महिला सांसद ने उन्हें बार-बार 'लुंगी वाला' कहकर चिढ़ाया गया। ब्रिटास ने सदन में यह बात उठाते हुए कहा कि मैं एक गौरवान्वित भारतीय, दक्षिण भारतीय और मलयाली हूं। हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता है, जिसे संविधान भी स्वीकार करता है। सदन में बहस और नोकझोंक समझ आती है, लेकिन इस तरह की व्यक्तिगत और सांस्कृतिक टिप्पणियां गरिमा के खिलाफ हैं।
जॉन ब्रिटास ने बीजेपी सांसद सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया है। ब्रिटास का आरोप है कि सुष्मिता देव ने उन्हें ‘लुंगी वाला’ कहकर अपमानजनक टिप्पणी की।
ब्रिटास की बात का जवाब देते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि देश में उत्तर या दक्षिण जैसा कोई विभाजन नहीं है, हम सभी सबसे पहले भारतीय हैं। सभापति ने सभी सदस्यों को नसीहत देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति अलग-अलग क्षेत्रीय पहचानों से मिलकर बनी है। किसी भी सदस्य की भाषा, पहनावे या खान-पान का अनादर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सदस्यों को एक-दूसरे की संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सभापति से अनुरोध किया कि वे दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनें और उचित निर्णय लें। इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि वे बहुत जल्द संबंधित सांसदों को अपने चैंबर में बुलाकर इस विवाद को सुलझाएंगे और मर्यादित आचरण सुनिश्चित करेंगे।