
Air India Pilot Drug Test: DGCA नए डोप टेस्ट नियम (फोटो सोर्स:@airindia)
Phuket Delhi Flight Turbulence: फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की AI 2379 फ्लाइट में अचानक ऊंचाई घटने और यात्रियों के घायल होने की घटना ने विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान फ्लाइट के पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव आने से मामला और संवेदनशील हो गया। अब नागर विमानन मंत्रालय ने DGCA से मौजूदा डोप टेस्ट व्यवस्था की समीक्षा करने और दुनिया के दूसरे देशों में लागू मानकों का अध्ययन कर संभावित बदलावों का खाका तैयार करने को कहा है।
इस पूरे विवाद के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार पायलटों में पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़े नियमों का लगातार अध्ययन कर रही है। उन्होंने DGCA यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन से इस विषय पर अपडेट भी मांगा है।
मंत्री के मुताबिक, अगर समीक्षा में मौजूदा नियम अपेक्षित स्तर के नहीं पाए गए तो सरकार उन्हें सुधारने में पीछे नहीं हटेगी। यानी आने वाले दिनों में पायलटों के ड्रग टेस्ट, स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान AI 2379 में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब विमान की ऊंचाई में अचानक करीब 300 फीट की कमी आई। विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया, लेकिन इस घटना में कई यात्रियों और क्रू सदस्यों को चोटें आईं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के बाद करीब 17 लोगों को चिकित्सकीय मदद की जरूरत पड़ी।
विमानन अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। इसी प्रक्रिया में विमान के दोनों पायलटों का अनिवार्य साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट कराया गया। शुरुआती जांच में पायलट-इन-कमांड का नमूना ऐसा पाया गया, जिसे आगे पुष्टि के लिए प्रयोगशाला भेजना पड़ा। बाद की रिपोर्टों में पुष्टि परीक्षण में मारिजुआना के लिए पॉजिटिव परिणाम आने की बात सामने आई है। हालांकि, इस परिणाम और उड़ान के दौरान पायलट के कथित रूप से प्रभावित होने के बीच सीधा संबंध जांच का विषय है।
पायलट के डोप टेस्ट से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद नागर विमानन मंत्रालय ने मामले को केवल एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा है। मंत्रालय ने DGCA को मौजूदा टेस्टिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, DGCA दूसरे देशों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर यह देखा जाएगा कि भारत में मौजूदा व्यवस्था में किसी तरह के बदलाव की जरूरत है या नहीं।
यानी आने वाले दिनों में चर्चा केवल यह नहीं होगी कि टेस्ट कब किया जाए, बल्कि यह भी अहम सवाल होगा कि किस परिस्थिति में टेस्ट अनिवार्य हो, कितनी बार रैंडम जांच हो और संदिग्ध परिणाम आने पर आगे की प्रक्रिया कितनी तेज हो।
भारत में फ्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच पहले से विमानन सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। किसी पायलट या संबंधित क्रू सदस्य का टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने पर मामला आगे की मेडिकल और नियामकीय प्रक्रिया में जाता है।
इस मामले ने हालांकि एक अहम सवाल को सामने ला दिया है अगर किसी पदार्थ की मौजूदगी का पता उड़ान के बाद चलता है, तो क्या केवल पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट पर्याप्त है?
यही वह बिंदु है जिस पर नियामक नए सिरे से विचार कर सकता है। संभावित बदलावों में टेस्टिंग की आवृत्ति, अचानक होने वाली जांच, सैंपल कलेक्शन की निगरानी और कन्फर्मेटरी टेस्ट की प्रक्रिया जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल निगाह DGCA की समीक्षा पर है। यही तय करेगी कि मौजूदा नियमों में मामूली बदलाव होगा या भारत में फ्लाइट क्रू की डोप टेस्ट व्यवस्था के लिए एक पूरी तरह नया और ज्यादा कड़ा प्रोटोकॉल सामने आएगा।
Updated on:
12 Aug 2026 01:59 pm
Published on:
12 Aug 2026 01:58 pm
