
Sanjay Raut on BJP: शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से छह लोकसभा सांसदों के पार्टी से अलग होने के बाद उद्धव ठाकरे गुट के भीतर की नाराजगी अब भी कायम है। इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि बीजेपी ने सत्ता और केंद्रीय एजेंसियों के प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को तोड़ने का काम किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब उनकी सत्ता आएगी तो बीजेपी को भी पता चलेगा कि पार्टियां कैसे टूटती हैं।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शरद पवार की पार्टी तोड़ी और उनकी पार्टी शिवसेना (उद्धव गुट) को भी तोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना को तोड़ने के बाद पार्टी को ऐसे लोगों के हाथों में सौंप दिया गया, जिनका मूल शिवसेना से कोई संबंध नहीं था।
संजय राउत ने कहा कि शिवसेना और शरद पवार की पार्टी के साथ जिस तरह की राजनीति की गई, उसे वे भूलने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक मतभेद नहीं है, बल्कि उनकी पार्टी को तोड़ने और उसका चुनाव चिह्न छीनने का मामला है।
राउत ने कहा कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी और ‘माफी’ का कोई सवाल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार एनडीए के साथ नहीं जाएंगे और उनकी राजनीति तथा स्वाभिमान अलग तरह का है।
बीजेपी को चुनौती देते हुए संजय राउत ने कहा कि जिस दिन उनकी पार्टी सत्ता में आएगी, उस दिन बीजेपी को भी सत्ता की ताकत का असर समझ में आएगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने जिस तरह ‘पार्टी तोड़ने की राजनीति’ को बढ़ावा दिया है, उसी का जवाब दिया जाएगा। राउत ने दावा किया कि सत्ता जाने के बाद बीजेपी के भीतर भी बड़ी उथल-पुथल हो सकती है। जिस दिन सत्ता जाएगी, बीजेपी खाली हो जाएगी। तब बीजेपी को पता चलेगा कि सत्ता किस तरह राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कथित हमले को लेकर भी उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सुरक्षा दी जा सकती है, तो अपने ही देश के एक राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा क्यों नहीं सुनिश्चित की जा सकती?
राउत ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सामने आए घटनाक्रम में बीजेपी कार्यकर्ताओं की भूमिका के सबूत होने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता हमेशा स्थायी नहीं होती। सत्ता आती है और जाती है, इसलिए वहां के मुख्यमंत्री को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।