नई दिल्ली

अंसल बंधुओं से मिले 60 करोड़ कहां गए…सुप्रीम कोर्ट के सवाल का दिल्ली सरकार ने दिया ये जवाब

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से अंसल बंधुओं द्वारा बतौर जुर्माना जमा कराए गए 60 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा था। दिल्ली सरकार ने अपना जवाबी हलफनामा सुप्रीम कोर्ट को दे दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने दिया 60 करोड़ का हिसाब।

Supreme Court: दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अंसल बंधुओं से बतौर जुर्माना मिले 60 करोड़ रुपये का हिसाब दिया है। साल 1997 में हुए उपहार अग्निकांड के दोषी पाए गए अंसल बंधुओं ने सितंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जुर्माने की यह रकम दिल्‍ली सरकार के पास जमा कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीती 16 जुलाई को दिल्ली सरकार से इस जुर्माना राशि के इस्तेमाल करने का हिसाब मांगा था।

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पहले जानिए क्या 60 करोड़ से जुड़ा मामला?

दरअसल, साल 1997 में दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में करीब 59 लोगों की मौत हो गई थी। सालों तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधुओं को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को बतौर जुर्माना 60 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार के पास जमा कराने का निर्देश दिया था। अंसल बंधुओं ने यह रकम सितंबर 2015 में दिल्ली सरकार के खाते में जमा करा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस रकम से द्वारका में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराने का आदेश दिया था, लेकिन द्वारका में इस रकम का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसी को लेकर बीती 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस रकम के इस्तेमाल करने का हिसाब मांगा था।

दिल्ली सरकार ने दिया ये जवाब

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर दिल्ली सरकार ने अपना जवाबी हलफनामा दायर किया। इसमें बताया कि साल 1997 के उपहार अग्निकांड मामले में दोषी पाए गए गोपाल अंसल और सुशील अंसल ने दिल्ली सरकार के पास 60 करोड़ रुपये जमा कराए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस रकम का द्वारका में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि यह रकम तीन अन्य सरकारी अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर बनाने में खर्च की गई है। दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल मंगोलपुरी, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल नरेला और सिरसपुर अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनवाया गया। इसमें इस रकम के साथ ही अतिरिक्त बजट आवंटन की व्यवस्‍था की भी गई।

द्वारका में नहीं बनवाया गया ट्रॉमा सेंटर

दिल्ली सरकार ने हलफनामा देकर बताया कि सुप्रीम कोर्ट के मूल निर्देशानुसार इस रकम को द्वारका में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर खर्च किया जाना था, लेकिन उस समय द्वारका में कोई जीएनसीटीडी (Government of National Capital Territory of Delhi) का अस्पताल नहीं था। जहां ऐसा ट्रॉमा सेंटर बनाया जा सके। इसके साथ ही इन इलाकों में स्वास्‍थ्य सुविधाओं की कमी थी। इसलिए द्वारका के बजाय इन अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया। ताकि आपात स्थितियों में लोगों को समय से इलाज मिल सके।

द्वारका में भी बनाया गया 1200 बेड का अस्पताल

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि द्वारका सेक्टर-9 में इंदिरा गांधी अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही 10 मई 2021 से यह अस्पताल संचालित किया जा रहा है। द्वारका में बनवाए गए 1200 से ज्यादा बेड की क्षमता वाले इंदिरा गांधी अस्पताल में 330 आईसीयू कक्षों की व्यवस्‍था की गई है। ताकि आपात स्थितियों में यहां के लोगों को दूर की बजाय घर के पास ही स्वास्‍थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकें।

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