
Arvind Kejriwal Bungalow: दिल्ली का वह सरकारी बंगला, जो पिछले कुछ सालों से राजनीतिक विवादों का केंद्र बना हुआ था, अब एक नए रूप में नजर आ सकता है। सिविल लाइंस स्थित 6 फ्लैग स्टाफ रोड की इस चर्चित संपत्ति को अब लग्जरी हॉस्पिटैलिटी कंपनी के जरिए संचालित करने की तैयारी चल रही है। दिल्ली सरकार इस बड़े परिसर को खाली रखने के बजाय इससे कमाई का साधन बनाने पर विचार कर रही है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) इस योजना पर काम कर रहा है कि इस संपत्ति को किसी अनुभवी होटल या हॉस्पिटैलिटी ग्रुप को संचालन के लिए दिया जाए। सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी संपत्ति के रख-रखाव में लगातार खर्च हो रहा है। अगर इसे व्यावसायिक मॉडल के तहत इस्तेमाल किया जाए तो सरकारी खर्च कम होने के साथ-साथ राजस्व भी प्राप्त हो सकता है।
यह वही बंगला है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के रहने के दौरान नवीनीकरण को लेकर काफी विवाद हुआ था। विपक्ष ने इस आवास पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल सुविधाएं बढ़ाने में किया गया। वहीं आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सफाई दी थी।
अब सरकार इस संपत्ति को लेकर एक नया रास्ता तलाश रही है। योजना के अनुसार, इस परिसर का इस्तेमाल सरकारी बैठकों, कार्यक्रमों और सम्मेलनों के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा जब सरकारी उपयोग नहीं होगा, तब इसे निजी संस्थाओं को भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा है कि सरकार ऐसी संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करने के विकल्प तलाश रही है। उनका कहना है कि किसी प्रोफेशनल एजेंसी को जिम्मेदारी देने से इसका प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सकेगा और सरकारी धन की बचत भी होगी।
जानकारी के मुताबिक, इस बंगले से जुड़े निर्माण और बदलाव का काम वर्ष 2021-22 के दौरान शुरू हुआ था। हालांकि, बाद में नवीनीकरण को लेकर उठे सवालों और जांच के चलते काम रोक दिया गया था। इससे पहले इस जगह को सरकारी गेस्ट हाउस या सांस्कृतिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने के विकल्प पर भी चर्चा हुई थी।
इस परियोजना पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च होने की बात सामने आई थी, जबकि आगे खर्च बढ़ने की संभावना भी जताई गई थी। यही वजह रही कि यह बंगला लंबे समय तक सियासी बहस का विषय बना रहा।
अब देखना होगा कि PWD की योजना किस दिशा में आगे बढ़ती है और इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति की जिम्मेदारी किस कंपनी को मिलती है। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है तो कभी राजनीतिक विवादों में रहा यह बंगला आने वाले समय में एक नए व्यावसायिक मॉडल के रूप में दिखाई दे सकता है।