पितृपक्ष या श्राद्ध (Shradh) 24 सितंबर से शुरू हो चुके हैं, जो 8 अक्‍टूबर को खत्‍म होंगे
शामली। पितृपक्ष या श्राद्ध (Shradh) 24 सितंबर से शुरू हो चुके हैं, जो 8 अक्टूबर को खत्म होंगे। श्राद्ध के दौरान बाजारों की रौनक गायब हो गई है। माना जाता है कि पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान लोग नए वाहन, फ्लैट, भूमि और अन्य सामान खरीदने से परहेज करते हैं। पंडित या पुजारी भी इस दौरान ऐसे करने से मना करते हैं। कहा जाता है कि पितृपक्ष में कोई खरीदारी या अच्छा कार्य करना वर्जित है। हालांकि, पंडित प्रभु शंकर शास्त्री की सोच कुछ अलग है। पंडित प्रभु शंकर शास्त्री शामली के सबसे प्रसिद्ध मंदिर के पुजारी हैं।
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कहा- बुरी आदतों को छोड़ने का लेना चाहिए संकल्प
शामली के शहर में हनुमान टीला हनुमान धाम मंदिर स्थित है। यह जिले का सबसे प्रसिद्ध और पुराना मंदिर बताया जाता है। पंडित प्रभु शंकर शास्त्री यहां के पुजारी है। उनका कहना है कि श्राद्ध के दौरान पितर घर पर आते हैं। उनका तर्पण किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब पितर हमें फलते-फूलते देखते हैं तो वे खुश होते हैं। ऐसे में वह अपना आशीर्वाद हमें देते हैं। इन दिनों नई वस्तुओं की खरीदारी करना कोई गलत बात नहीं है। हां, इस दौरान हमें हर बुरे कार्य से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा हमें बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस भ्रम से दूर रहना चाहिए कोई भी नया काम करना या नया सामान लेना अशुभ होता है।
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पितृ पक्ष आम दिनों की तुलना में शुभ
उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष तो आम दिनों की तुलना में अधिक शुभ होते हैं। इन दिनों में हमारे साथ में पितर भी होते हैं। इसके साथ ही श्राद्ध गणेश चतुर्थी और नवरात्र के बीच में पड़ता है तो शुभ कार्य में क्या दिक्कत। वैसे भी हमारे बुजुर्ग हमारी सफलता से खुश ही होंगे, दुखी तो होंगे नहीं। इससे पितरों को तो खुशी ही मिलेगी। उनका कहना है कि पुराने समय में लोगों का ज्यादातर समय पूजा-पाठ में बीत जाता था। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान और लोग सामान खरीदने का समय नहीं निकाल पाते थे। बाद में यह परंपरा बन गई।
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