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Patrika Podcast: मां ही बनाती है भगवान

अपनी चेतना से मां उसमें ज्ञान और वैराग्य का बीज बोती है। जागरुक मां ही शिशु को सही दिशा में प्रेरित कर सकती है। सकारात्मक भावों का चिंतन व मनन ही ज्ञान और वैराग्य भावों के साथ उसके यश प्राप्ति के मार्ग में सहायक बनते हैं। मां का हर स्पन्दन शिशु महसूस करता है। अत: मां का कत्र्तव्य है कि वह गर्भकाल में यथानुरूप आहार-विहार करे। ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- मां ही बनाती है भगवान
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Aug 21, 2026
sharir hi brahmand
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Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: गर्भस्थ और भूमिष्ठ दोनों ही अवस्थाओं में मां ही निर्मात्री है, जो गर्भ में जल तत्त्व की तरह चारों ओर समाहित रहकर गर्भ में रक्षिका बनती है। बाहर आने पर वह वायु तत्त्व के समान वेष्टन भाव के साथ गति, प्रेरणा और दिशा प्रदान करती है। अपने आचरण, स्नेह, संस्कार और ऊर्जा से संतान को भगवत् स्वरूप में प्रतिष्ठापित करने का महनीय कर्म करती है।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-

Updated on:
21 Aug 2026 07:39 pm
Published on:
21 Aug 2026 06:24 pm