-मनीष कौशिक ने बॉक्सिंग टूर्नामेंट के फाइनल में जीत हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।-मनीष के स्वर्ण पदक सहित भारत ने 10 पदकों के साथ टूर्नामेंट का समापन किया।-महिलाओं में एशियाई चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता पूजा रानी (75 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता मनीष कौशिक (Manish Kaushik) (63) ने स्पेन के कास्टेलॉन में 35वें बॉक्सिंग टूर्नामेंट (Boxam International Tournament) के फाइनल में जीत हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। मनीष के स्वर्ण पदक सहित भारत ने 10 पदकों के साथ टूर्नामेंट का समापन किया। एशियन ओलंपिक क्वालीफायर के बाद से अपना पहला टूर्नामेंट खेल रहे मनीष ने फाइनल में डेनमार्क के निकोलेई टी को 3-2 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। हालांकि विकास कृष्ण को 69 किग्रा के फाइनल में स्थानीय मुक्केबाज यौबा सिसोखो से 1-4 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
महिलाओं में एशियाई चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता पूजा रानी (75 किग्रा) को स्वर्ण पदक मुकाबले में अमरीका की मेलिसा ग्राहम से 0-5 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहीं जैसमीन को फाइनल में यूरोपियन चैंपियन एर्मा टेस्टा के खिलाफ 0-5 से हार का मुंह देखना पड़ा। जैसमीन को रजत पदक मिला।
अन्य पांच रजत पदकों में सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), मोहम्मद हुसामुद्दीन (57), आशीष कुमार (75 किग्रा), सुमी सांगवान (81 किग्रा) और सतीश कुमार (91 प्लस किग्रा) शामिल रहे। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आशीष फाइनल मुकाबले से हट गए हैं और उन्हें रजत पदक दिया गया। इससे पहले छह बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरी कॉम (51 किग्रा) को अमरीका की वर्जिनिया फुच्स से हार का सामना करना पड़ा।
चमके हरियाणा के बॉक्सर
स्पेन में हुए 35वें बॉक्सम इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भारत की शानदार परफॉर्मेंस रही। भिवानी के मनीष कौशिक ने गोल्डन पंच लगाया तो ओलंपियन विकास यादव, पूजा बोहरा समेत आठ मुक्केबाजों ने सिल्वर मेडल जीता। मैरिकॉम को कांस्य प्राप्त हुआ। इस प्रकार स्पेन से भारत की झोली में 10 पदक गए। स्पेन से वापस आने के बाद ये खिलाड़ी ओलंपिक कैंप में शामिल होंगे। टोक्यो आलंपिक 23 जुलाई से 8 अगस्त तक टोक्यो में होना है। इसके लिए ये मुक्केबाज पसीना बहाएंगे। वहीं गोल्डन ब्वॉय रोहतक के अमित पंघाल को निराशा हाथ लगी और वो पदक लेने से वंचित रह गए। वहीं हरियाणा के हाथ एक स्वर्ण तो चार रजत पदक लगे हैं।