Parineeti Chopra: परिणीति चोपड़ा के शो 'मॉम टॉक्स' में एक्ट्रेस दिशा परमार पहुंची। इस दौरान उन्होंने ब्रेस्टफीडिंग के संघर्ष और प्रेग्नेंसी से जुड़े समाज के दबाव पर खुलकर बात की। साथ ही मदरहुड पर भी खुलकर अपनी बात लोगों के सामने रखी।
Disha Parmar On breastfeeding, pregnancy myths: परिणीति चोपड़ा इन दिनों अपने पति राघव चड्ढा के BJP में शामिल होने को लेकर ट्रोल हो रही है। लोग उनके पति को उनसे अच्छा एक्टर बता रहे हैं। इसी बीच हर कोई जानता है कि परिणीति अपना खुद का नया शो लेकर आई हैं। जिसमें टीवी सितारों से लेकर बॉलीवुड सितारें भी पहुंच रहे हैं। वहीं, इस बार उनके शो में एक्ट्रेस दिशा परमार पहुंची। जहां उन्होंने प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग पर मिथ को लेकर कई खुलासे किए।
मां बनने का सफर जितना खूबसूरत होता है, उतनी ही चुनौतियों से भरा भी होता है। अक्सर फिल्मों और विज्ञापनों में मां बनने की प्रक्रिया को बहुत आसान और जादुई दिखाया जाता है, लेकिन असल जिंदगी में एक महिला 9 महीने किन मानसिक और शारीरिक बदलावों से गुजरती है, इस पर शायद ही कोई खुलकर बात करता है। बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने अपने चैट शो 'मॉम टॉक्स' के जरिए इसी खामोशी को तोड़ने की कोशिश की है। शो के लेटेस्ट एपिसोड में टीवी की मशहूर एक्ट्रेस दिशा परमार बतौर मेहमान शामिल हुईं और उन्होंने मां बनने के उन पहलुओं पर बात की, जिन्हें अक्सर समाज में 'टैबू' माना जाता है।
चर्चा की शुरुआत ब्रेस्टफीडिंग जैसे संवेदनशील विषय से हुई। दिशा परमार ने बहुत ही ईमानदारी से स्वीकार किया कि नई मां के लिए ब्रेस्टफीडिंग हमेशा सहज या स्वाभाविक नहीं होती। उन्होंने बताया कि इस दौरान महिलाएं केवल शारीरिक दर्द ही नहीं, बल्कि भारी भावनात्मक तनाव और खुद पर शक जैसी स्थितियों से भी गुजरती हैं। दिशा ने कहा, "समाज मान लेता है कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है तो आसानी से हो जाएगी, लेकिन इसके पीछे का संघर्ष कोई नहीं देखता।"
परिणीति, जिन्होंने खुद अक्टूबर 2025 में अपने बेटे 'नीर' का स्वागत किया है, ने भी दिशा की बातों पर सहमति जताई। दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर कोई मां किसी कारण ब्रेस्टफीड नहीं करा पाती या उसे परेशानी होती है, तो उसे जज करना या उसे 'बुरी मां' का टैग देना बिल्कुल गलत है। संदेश साफ था- बच्चे को दूध पिलाने का तरीका मां की ममता का पैमाना नहीं हो सकता।
एपिसोड का दूसरा बड़ा हिस्सा प्रेग्नेंसी से जुड़े उन मिथकों पर था, जो सदियों से चले आ रहे हैं। दिशा ने बताया कि जैसे ही कोई महिला गर्भवती होती है, आसपास के लोग उसे सलाहों की पोटली थमा देते हैं। क्या खाना है, कैसे बैठना है, यहां तक कि कैसा व्यवहार करना है- हर चीज पर समाज की एक राय होती है। दिशा और परिणीति ने इस बात पर चर्चा की कि ये अनगिनत उम्मीदें गर्भवती महिला के लिए मानसिक बोझ बन जाती हैं।
यह एपिसोड न केवल सूचनात्मक था, बल्कि काफी इमोशनल भी रहा। परिणीति और दिशा के बीच की बॉन्डिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया। शो का मुख्य उद्देश्य यही है कि सेलिब्रिटी होने के बावजूद ये मांएं उन अनुभवों को साझा करें जिनसे हर आम महिला गुजरती है, ताकि कोई भी मां खुद को इस सफर में अकेला महसूस न करे। 'मॉम टॉक्स' का यह एपिसोड मातृत्व के असली, अनफिल्टर्ड और सच्चे स्वरूप को पेश करता है।
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