Sharib Hashmi wife cancer news: 'द फैमिली मैन' फेम एक्टर शारिब हाशमी की पत्नी नसरीन छठी बार कैंसर की चपेट में आ गई हैं और इस बार बीमारी पूरे शरीर में फैल चुकी है। उन्होंने बताया कि जिसे वह छोटी खांसी समझ रहे थे उसने बाद में विकराल रूप ले लिया। उन्हें मुंह में छोटा सा छाला हुआ जो कैंसर निकला।
Sharib Hashmi Nasreen cancer relapse: पर्दे पर शारिब हाशमी को हमने हमेशा मुस्कुराते और हर मुश्किल को हल्के-फुल्के अंदाज में संभालते देखा है। 'द फैमिली मैन' में जेके तलपड़े का किरदार हो या कोई और रोल, शारिब हमेशा सहज और खुशमिजाज नजर आते हैं। लेकिन इस हंसमुख चेहरे के पीछे एक बेहद दर्दनाक कहानी है जिसे जानकर दिल भारी हो जाता है। शारिब की पत्नी नसरीन इस समय छठी बार कैंसर से जंग लड़ रही हैं।
नसरीन को अगस्त 2018 में पहली बार मुंह के कैंसर का पता चला था और तब से उनकी पांच सर्जरी हो चुकी हैं। सितंबर 2024 में हुई उनकी आखिरी सर्जरी के बाद उनकी बीमारी में सुधार हो गया था, लेकिन इस साल की शुरुआत में यह फिर से लौट आई। बीमारी के दोबारा होने का पता कैसे चला?
यह बताते हुए शारिब ने कहा, “उन्हें दो-ढाई महीने से खांसी चल रही थी और उस समय खराब AQI के कारण सभी को खांसी हो रही थी। इसलिए हमने सोचा कि शायद इसी वजह से हो रहा है। हमने एक्स-रे भी करवाया, जिसमें कोई समस्या नहीं थी। लेकिन फरवरी के बीच में उनके मुंह में छाला हो गया और हम तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचे। बायोप्सी और पीईटी स्कैन ने हमारे पैरों तले जमीन खिसका दी- कैंसर पूरी ताकत के साथ वापस आ चुका था और अब पूरे शरीर में फैल गया था।"
एक कंटेंट क्रिएटर के तौर पर जब मैं इस कहानी को देखता हूं, तो मुझे इसमें सबसे बड़ा ह्यूमन एंगल 'एक पिता और पति की लाचारी' में नजर आता है। शारिब आज उस दोराहे पर खड़े हैं, जहां उनका दिल अपनी बीमार पत्नी के पास रुकना चाहता है, लेकिन उनके हाथ काम की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। शारिब कहते हैं, "मुझे पैसे कमाने हैं क्योंकि खर्चे बहुत ज्यादा हैं। मेरा मेडिकल इंश्योरेंस भी इस इलाज के खर्च को कवर नहीं कर पा रहा। पिछले साल भी काम कम था और इस साल की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। अब मेरे पास किसी भी रोल को मना करने की हिम्मत नहीं है। कीमो और इम्यूनोथेरेपी के बाद हमें बहुत महंगी 'टारगेटेड थेरेपी' करवानी है। मुझे बस और काम चाहिए।"
इस पूरी जंग का सबसे इमोशनल पहलू उनके बच्चे हैं। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि जब घर का कोई एक सदस्य लंबे समय तक गंभीर बीमार रहता है, तो बच्चे समय से पहले मैच्योर हो जाते हैं। शारिब के बच्चे 2018 से अपनी मां को टूटते-संभलते देख रहे हैं। आज हालत यह है कि वह माता-पिता को और परेशान नहीं करना चाहते, इसलिए अपने मन का डर, उदासी और रोना उनके सामने जाहिर भी नहीं करते। वह अंदर ही अंदर घुट रहे हैं, लेकिन चेहरे पर मजबूती का मुखौटा लगाए खड़े हैं।