पाली

US Israel-Iran War: डामर, फ्यूल और प्लास्टिक की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, पाली में कई फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर

Pali News: पाली में कपड़ा उद्योग अब गहरी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे माल की भारी कमी से उत्पादन और निर्यात दोनों कम हो चुके हैं।

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Apr 07, 2026
एआई तस्वीर

पाली। पश्चिम एशिया में इजराइल, अमरीका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की तपिश से कपड़ा उद्योग तार-तार हो रहा है। मेहंदी का रंग फीका पड़ने लगा है। सड़कों का डामर पिघल रहा है। उद्योगों में उपयोग होने वाली सामग्री के दाम दोगुना तक बढ़ गए हैं। उस लागत में भी सामग्री उपलब्ध नहीं हो रही है।

सोजत से खाड़ी देशों और यूरोप के अन्य देशों में मेहंदी का निर्यात नहीं हो पा रहा है। पाली की टेक्सटाइल इकाइयों को ग्रे कपड़ा, कलर केमिकल, पैकिंग मटेरियल और अन्य सामग्री मुश्किल से मिल रही है। उद्यमियों के अनुसार, यदि ऐसे ही हालात बने रहे तो आने वाले एक माह में उद्योगों पर आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।

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डामर और फ्यूल के दामों से रुके काम

डामर के दाम 27 फरवरी को 42 हजार रुपए प्रति टन थे। अब यह 72 हजार रुपए प्रति टन हो गए हैं और डामर मिलना भी मुश्किल हो रहा है। एलडीओ (फ्यूल) के दाम में भी तेजी आई है। पहले यह 57-60 रुपए प्रति लीटर था, जो अब 171 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सीसी रोड निर्माण में उपयोग होने वाला प्लास्टिक पहले 80 रुपए प्रति किलो था, अब यह 125-130 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। सफेद प्लास्टिक के दाम 100 रुपए से बढ़कर 170 रुपए हो गए हैं।

कपड़ा उद्योग में हर चीज के दाम बढ़े

कपड़े में कलर केमिकल, फ्यूल और पैकिंग मटेरियल की कीमतें बढ़ गई हैं। पैकिंग के लिए 110-115 रुपए की थैली अब 190 रुपए तक पहुंच गई है। बारदान के दाम भी बढ़ गए हैं। पाली की इकाइयां पहले से ही कम क्षमता पर चल रही हैं। कच्चे माल की आपूर्ति कम होने और दाम बढ़ने के कारण उद्यमी चाहकर भी उत्पादन बढ़ा नहीं पा रहे हैं। भिवंडी और सूरत में कुछ इकाइयां बंद हो गई हैं, जिसका प्रभाव पाली पर भी पड़ रहा है।

मेहंदी का काम रह गया 60 प्रतिशत

सोजत से मेहंदी देश के विभिन्न हिस्सों के साथ खाड़ी और यूरोप के देशों में निर्यात की जाती है। सोजत में सालाना करीब 5000 टन से अधिक मेहंदी तैयार होती है, जिसमें से करीब 3500-4000 टन मेहंदी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों या मार्ग से गुजरती है। इस समय उसका निर्यात पूरी तरह ठप हो चुका है। मेहंदी पत्तों के दाम 130 रुपए से घटकर 110 रुपए पर आ गए हैं।

मेहंदी पर बड़ा प्रभाव

मेहंदी पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। कई उद्यमियों की मेहंदी पोर्ट पर अटकी हुई है, जिससे भाड़ा बढ़ रहा है। देश के स्थानीय बाजार में भी युद्ध के कारण मंदी आई है। सोजत में 200 से अधिक मेहंदी की इकाइयों में कार्य लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो गया है।

  • विकास टांक, संरक्षक, मेहंदी व्यापार संघ समिति, सोजत

केमिकल नहीं मिल रहे

रॉ मटेरियल की लागत लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गई है। प्लास्टिक की पैकिंग सामग्री और केमिकल के दामों में उछाल आया है। केमिकल नहीं मिल रहे हैं। जो इकाइयां चल रही हैं, वे भी 15-20 दिन में कच्चा माल नहीं मिलने पर बंद हो सकती हैं।

  • अशोक लोढ़ा, अध्यक्ष, सूर्यप्रकाश चौपड़ा, सचिव, सीईटीपी

कार्य लगभग बंद है

कार्य लगभग बंद था। जो कार्य अंतिम चरण में था, वह जारी है। क्रूड के दाम और बढ़ने की भी आशंका है। नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं किए जा रहे हैं। सीमेंट के दाम लगभग 30 रुपए तक बढ़ सकते हैं। पहले सीमेंट करीब 291 रुपए प्रति बैग था। एलडीओ के दाम 1 अप्रेल को 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए थे।

  • खेमचंद प्रजापत और कूंदनसिंह, सड़क निर्माण संवेदक

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