Rajasthan : केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) पाली की ओर से 10 साल की मेहनत के बाद खारच (खारे पानी) भूमि में उगने वाले आम की किस्म विकसित की गई है। जानें और।
राजीव दवे
Rajasthan : मारवाड़ की मरु भूमि के खेतों में कुछ साल बाद आम के बगीचे होंगे। दशहरी, लंगड़ा, चौस, केसर, अल्फांसों आदि प्रसिद्ध किस्मों के साथ मारवाड़ी आम का स्वाद भी लोगों को भाएगा। पाली केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) की ओर से दस साल की मेहनत के बाद खारच (खारे पानी) भूमि में उगने वाले आम की किस्म विकसित की गई है। मारवाड़ और राजस्थान के भूमि की लवणीय परिस्थितियों में लवणीय सहनशील आम (मैंगिफेरा इंडिका एल.) जीनोटाइप तैयार किया गया है। पाली में इस आम का पेड़ लवणीय परिस्थितियों में उगाने पर तीन साल में पूरे फल देने लगा।
काजरी के वैज्ञानिक विजयसिंह मीणा ने बताया कि वैसे तो पेड़ तीन साल से पहले ही फल देने लगता है, लेकिन पेड़ को अधिक पोषित व बेहतर बनाने के लिए फल नहीं उतारे। तीसरे साल उतारे। अब करीब 400 पेड़ और तैयार किए जा रहे हैं।
आम को तैयार करने के लिए लैंडरेस किस्म (परंपरागत किस्में) ली गई। उसके पौधों को विनियर ग्राफ्टिंग के से प्रवर्धित किया गया फिर यह पौधा तैयार हुआ। इस तरह से तैयार एक पेड़ से 300 से अधिक आम प्राप्त किए।
आम का फल उगाने के प्रारंभिक विकास चरण और वयस्क अवस्था दोनों में संभावित नमक सहिष्णु जीनोटाइप की पहचान करने के लिए जांच की गई थी। नमक-सहिष्णुता के संभावित आधार का अभी भी अध्ययन किया जा रहा है।
डॉ. एके शुक्ल, प्रभारी, काजरी, पाली
काजरी आरएसएस पाली ने 2014 से 2024 तक विभिन्न जीनोटाइप की आनुवंशिक आकृति विज्ञान और गुणवत्ता का अध्ययन किया। अब फलन (300 से अधिक फल) और गुणवत्ता (आम के गूदे में घुली शर्करा, विटामिन और अन्य ठोस पदार्थों की मात्रा) का मिश्रण वाला फल मिला। पेड़ तैयार करने में एम. नूर, एसआर मीणा, कमला, अरविंद तेतरवाल, मनोज कुमार और सुमंत व्यास ने सहयोग किया।
आम को लवणीय परिस्थितियों के प्रति विशेष रूप से विकास के प्रारंभिक चरण में अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। लवणीय हालात में पत्तियों के सिरे और किनारे झुलस जाते हैं, पत्तियां मुड़ जाती हैं। वृद्धि कम हो जाती है, पत्तियां झड़ जाती हैं और पेड़ों की मृत्यु हो जाती है। जिससे अंकुरों का विकास अवरुद्ध हो जाता है। आम का पेड़ फल नहीं देता है।