पाली जिले के मरुसागर जवाई बांध से चार पाण की सिंचाई पूरी होने के बाद भी बांध में पर्याप्त पानी शेष है। मौजूदा भंडार को देखते हुए वर्ष 2026 तक जल संकट की आशंका नहीं के बराबर मानी जा रही है।
पाली। पश्चिमी राजस्थान के मरुसागर जवाई बांध से चार पाण का पानी दिया जा चुका है। बांध में वर्ष 2025-26 के लिए 4900 एमसीएफटी पानी सिंचाई के लिए आरक्षित किया गया था, जो वर्ष 2002 के बाद पिछले 24 वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले वर्ष 2007-08 में 4783 एमसीएफटी पानी दिया गया था।
खास बात यह है कि चार पाण की सिंचाई पूरी होने के बाद 28 फरवरी को बांध में 3322 एमसीएफटी पानी शेष है। इसमें से 550 एमसीएफटी डेड स्टोरेज निकालने के बाद भी करीब 2700 एमसीएफटी पानी उपलब्ध रहता है। पाली जिले, ब्यावर के जैतारण और सिरोही के शिवगंज शहर के लिए प्रतिदिन लगभग 8 एमएसीएफटी पानी उपयोग करने पर यह भंडार करीब 11 माह तक पर्याप्त रहेगा। ऐसे में यदि किसी कारणवश वर्षा नहीं भी होती है तो भी वर्ष 2026 में जल संकट की आशंका नहीं है।
जवाई बांध से सिंचाई के लिए पानी अंतिम छोर तक पहुंचाया गया। जवाई बांध के सहायक अभियंता अक्षय कुमावत ने बताया कि जेईएन अशोक पुनिया, प्रताप सिंह, राजू लाल गुर्जर और राकेश प्रजापत ने चार माह तक लगातार 24 घंटे मॉनिटरिंग की, जिससे पानी खेतों तक पहुंचा और दुरुपयोग नहीं हुआ। इसका परिणाम है कि बांध में अभी भी पर्याप्त जल भंडार उपलब्ध है।
जवाई बांध में जल आवक नहीं होने के कारण वर्ष 2009-10 में जल स्तर माइनस 10.37 तक पहुंच गया था, जो सबसे निचला स्तर रहा। वर्ष 2003-04 में जल स्तर माइनस 3.40, वर्ष 2016-17 में माइनस 4.20 और वर्ष 2022-23 में माइनस 8.45 दर्ज किया गया था। बरसात से पहले पिछले 23 वर्षों में सबसे अधिक गेज वर्ष 2023-24 में 28.75 एमसीएफटी दर्ज किया गया।
जवाई बांध से चार पाण का पानी दिया जा चुका है। इसके बाद भी बांध में अभी काफी पानी शेष है। अच्छी बरसात और जमीन में नमी के कारण यह पानी संरक्षित रह पाया है।
- राज भवरावत, अधिशासी अभियंता, जवाई बांध