
Bankipur Bypoll Result: बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन बड़े सियासी उलटफेर का रहा। लंबे समय से बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज के प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। चुनाव परिणाम के बाद अब इस हार के कारणों और पूरे चुनाव के दौरान चर्चा में रहे "कुत्ता-बिल्ली" वाले बयान पर सियासी बहस तेज हो गई है।
चुनाव से पहले बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद का एक कथित बयान चर्चा में आया था कि बांकीपुर बीजेपी का इतना मजबूत गढ़ है कि पार्टी यहां से "किसी कुत्ता-बिल्ली को भी उम्मीदवार बना दे तो वह जीत जाएगा।" हालांकि, चुनाव के दौरान उन्होंने इस बयान से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा।
इसके बावजूद प्रशांत किशोर ने इसी मुद्दे को चुनाव प्रचार का प्रमुख हथियार बनाया। उन्होंने इसे बीजेपी के उम्मीदवार चयन से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि पढ़े-लिखे मतदाताओं वाली इस विधानसभा में पार्टी बेहतर उम्मीदवार उतार सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना रहा।
उपचुनाव के नतीजों के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर ने चुनाव के दौरान "फर्जी नैरेटिव" तैयार किया। गिरिराज सिंह ने कहा, "बीजेपी के किसी भी नेता ने कभी यह नहीं कहा कि बांकीपुर से बीजेपी किसी कुत्ते-बिल्ली को भी टिकट दे देगी तो वह चुनाव जीत जाएगा। ऐसी बातें हमारे विरोधियों ने फैलाईं और उसी आधार पर फर्जी नैरेटिव तैयार किया गया।"
बीजेपी ने पहले अभिषेक 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया और उनके नामांकन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लेकिन अगले ही दिन अभिषेक बंटी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने से मतदाताओं के बीच गलत संदेश गया और इससे पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठे।
उपचुनाव की घोषणा से करीब दो महीने पहले ही प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में सक्रिय अभियान शुरू कर दिया था। स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर उन्होंने लगातार जनसंपर्क किया। जब तक बीजेपी पूरी तरह सक्रिय होती, तब तक चुनावी माहौल काफी हद तक बदल चुका था। बीजेपी ने बाद में प्रचार तेज किया और वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाला, लेकिन प्रशांत किशोर स्थानीय समस्याओं और सत्ता विरोधी नाराजगी को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाने में सफल रहे।
बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। इसी वजह से पार्टी के भीतर जीत को लेकर अधिक आत्मविश्वास देखा गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर बूथ स्तर पर भी दिखाई दिया। कई जगह कार्यकर्ता मतदाताओं को बूथ तक लाने में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा सके। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की टीम ने बूथ स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट पर जोर दिया और अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया।
चुनाव प्रचार के दौरान युवा मतदाताओं, खासकर पहली बार मतदान करने वाले वोटरों के बीच प्रशांत किशोर की अच्छी पकड़ देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग राजनीतिक पसंद जाहिर करते दिखे।
आरजेडी के वोट बैंक में सेंध 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी इस सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन 2026 के उपचुनाव में वह तीसरे स्थान पर खिसक गई। माना जा रहा है कि आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर गया। साथ ही, तेजस्वी यादव के अपेक्षाकृत देर से चुनाव प्रचार में उतरने और पार्टी के कई बड़े नेताओं के सीमित प्रचार को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है। इन सभी कारणों ने मिलकर बांकीपुर उपचुनाव को बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण बना दिया। वहीं, प्रशांत किशोर ने स्थानीय मुद्दों, चुनावी रणनीति और बूथ स्तर की तैयारी के दम पर एक ऐसी सीट पर जीत दर्ज की, जिसे लंबे समय तक बीजेपी का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा।