एनकाउंटर में मारा गया रामधनी यादव भागलपुर में दहशत का पर्याय था। पूर्व में वह एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर लेकर थाने पहुंच चुका था।
भागलपुर पुलिस ने सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े हुए हत्याकांड के महज 12 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी और कुख्यात अपराधी रामधनी यादव को एनकाउंटर में मार गिराया। रामधनी यादव के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। भागलपुर एसपी के अनुसार, उसने पूर्व में एक व्यक्ति की हत्या कर उसका सिर लेकर थाने पहुंचने जैसी सनसनीखेज वारदात को भी अंजाम दिया था। पुलिस का कहना है कि इस बार भी उसे उम्मीद थी कि वह पुलिस पर फायरिंग कर दहशत फैलाकर फरार हो जाएगा, लेकिन जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, रामधनी यादव पूरे क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन चुका था। उसकी पत्नी नीलम देवी सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामधनी यादव का सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू से लंबे समय से विवाद चल रहा था। मंगलवार को भी उसके लोग उसी को निशाना बनाने पहुंचे थे। लेकिन जब कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद के टेंडरों को लेकर भी विवाद चल रहा था। रामधनी यादव चाहता था कि लाभदायक टेंडर उसके अनुसार बांटे जाएं, जबकि सभापति राजकुमार साह इसका विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद गहरा गया और रामधनी ने राजकुमार साह को खत्म करने की योजना बनाई थी।
सूत्रों के अनुसार, रामधनी यादव और राजकुमार साह के बीच लंबे समय से दुश्मनी चली आ रही थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फरवरी 2023 में रामधनी पर भी जानलेवा हमला हुआ था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दो शूटरों ने उसके घर के पास ही उस पर गोली चलाई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया था।
इस मामले में शामिल आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि रामधनी की हत्या के लिए 5 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी, जिसमें सभापति राजकुमार साह का नाम सामने आया था। हालांकि, पुलिस को इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी पुरानी रंजिश और हालिया टेंडर विवाद के चलते मंगलवार को रामधनी यादव के लोगों ने सुल्तानगंज नगर परिषद में घुसकर राजकुमार साह पर जानलेवा हमला किया।