पटना

भरत तिवारी एनकाउंटर: बिहार पुलिस ने माना हैंडलिंग में हुई चूक, ADG बोले- समय रहते नहीं कर सके नियंत्रण

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पहली बार बिहार पुलिस ने माना है कि शुरुआती कार्रवाई में चूक हुई थी। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया कि 16 जून को मौके पर पहुंची पुलिस टीम आरोपी को समय पर नियंत्रित नहीं कर सकी, जिसके बाद घटनाक्रम ने बड़ा रूप ले लिया।
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Jun 22, 2026
bihar police on bharat tiwari encounter
एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार और भरत तिवारी

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर लोगों में आक्रोश है। इस मामले में पहली बार बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए ADG (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने माना कि इस मामले को संभालने और स्थिति को नियंत्रित करने में शाहपुर पुलिस से लापरवाही हुई थी। इसी कारण पुलिस मुख्यालय ने शाहपुर थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

अधिकारी आरोपी को संभालने में नाकाम रहे- ADG

घटना के बारे में पुलिस के वर्ज़न और उनकी कार्रवाई पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए ADG सुधांशु कुमार ने कहा, "इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। चूक तब हुई जब हमारे पुलिस अधिकारी 16 जून को पहली बार मौके पर पहुंचे और आरोपी को सही ढंग से संभालने में नाकाम रहे। हमारी टीम समय रहते उसे काबू में नहीं कर पाई, जिसके बाद घटना के वीडियो और अन्य फुटेज वायरल हो गए। इस भारी लापरवाही के आरोप में शाहपुर के तत्कालीन SHO, दो सब-इंस्पेक्टर (SI), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कॉन्स्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।"

जब पूछा गया कि क्या यह एनकाउंटर शाहपुर पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का मामला बन गया था तो ADG ने कहा कि यह मामला अभी न्यायिक जांच के दायरे में है। इसलिए, इस पर कोई टिप्पणी करना या पूर्वाग्रहपूर्ण बयान देना उचित नहीं होगा।

एनकाउंटर कभी भी पुलिस की उपलब्धि नहीं हो सकती

एनकाउंटर नीतियों पर बिहार पुलिस का रुख स्पष्ट करते हुए ADG सुधांशु कुमार ने कहा कि पुलिस किसी की जान लेने को सफलता नहीं मानती है। उन्होंने कहा, "एनकाउंटर को कभी भी पुलिस की उपलब्धि नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह कहना बिल्कुल सही है कि जब भी हमारी जान को खतरा होता है, तो पुलिस आत्मरक्षा में गोली चलाती है। कानून के तहत यह एक अपवाद है। अगर ऐसी घटना के दौरान आरोपी को गोली लग जाती है, तो यह कार्रवाई आत्मरक्षा के अधिकार के दायरे में आती है।"

हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे न्यायिक जांच, DIG शाहाबाद को कमान

ADG (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने साफ किया कि पूरी घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए पटना हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग द्वारा उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच की जा रही है। साथ ही कानूनी और वैज्ञानिक पुलिस जांच की जिम्मेदारी DIG (शाहबाद) को सौंपी गई है, जिन्हें इस मामले की निगरानी के लिए विशेष रूप से अधिकृत किया गया है। चूंकि अब यह मामला पूरी तरह से न्यायिक जांच के दायरे में है, इसलिए पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी संभावित पक्षपात से बचने के लिए कोई जल्दबाजी में बयान नहीं देंगे और अब सभी को आयोग की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

Updated on:
22 Jun 2026 05:26 pm
Published on:
22 Jun 2026 05:25 pm
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