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भरत तिवारी एनकाउंटर को पप्पू यादव ने बताया सोची-समझी हत्या, कहा- रिशु श्री केस को दबाने के लिए दी गई निर्दोष की बलि

Purnia MP on Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अब एक नया बयान दिया है। पप्पू यादव ने एनकाउंटर को कथित तौर पर एक बड़ी साजिश बताते हुए इसे बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले से जोड़ दिया और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

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पटना

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Anand Shekhar

Jun 22, 2026

pappu yadav on bharat tiwari encounter

भरत तिवारी और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव (फोटो- bharat tiwari and rajesh ranjan facebook)

Pappu Yadav on Bharat Tiwari Encounter: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को सोची-समझी हत्या करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि यह एनकाउंटर कोई साधारण कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि बिहार में हुए करोड़ों रुपये के रिशु श्री टेंडर घोटाले से जुड़े प्रभावशाली मंत्रियों और अधिकारियों को बचाने के लिए रची गई एक साजिश है।

टेंडर घोटाले से ध्यान भटकाने की साजिश- पप्पू यादव

सोशल मीडिया फेसबुक पर लाइव आकर सांसद पप्पू यादव ने सरकार के इरादों और पुलिस द्वारा बताई गई घटना की कहानी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार का प्रशासनिक तंत्र इस समय भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क को छिपाने की कोशिश में लगा हुआ है। पप्पू यादव ने कहा, " यह पूरा एनकाउंटर सिर्फ़ इसलिए किया गया ताकि रिशु श्री मामले को जनता की नज़रों से छिपाया जा सके।"

पप्पू यादव ने आगे कहा, "धोखाधड़ी का यह जाल IAS अधिकारी आनंद किशोर और धर्मेंद्र जैसे प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों को बचाने के लिए बुना गया था। RWD, BUIDCO और भवन निर्माण विभाग के कई वरिष्ठ मंत्री सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं। उनके खिलाफ कोई FIR दर्ज न हो और जनता का ध्यान रिशु श्री टेंडर घोटाले से पूरी तरह हट जाए, इसके लिए एक सोची-समझी साज़िश के तहत दुर्भाग्यपूर्ण, निर्दोष और होनहार भरत तिवारी की हत्या कर दी गई।"

भरत तिवारी विस्थापितों की आवाज थे, अपराधी नहीं – पप्पू यादव

पप्पू यादव ने पुलिस की उस थ्योरी को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें भरत तिवारी को पेशेवर अपराधी, शूटर या गैंग लीडर बताया गया था। उन्होंने कहा कि जब धरहर जमोनिया गांव कटाव की चपेट में था और लोग बेघर होकर डूबने के खतरे का सामना कर रहे थे, तब कोई बड़ा नेता मदद के लिए नहीं आया। सिर्फ पप्पू यादव और यह नौजवान (भरत तिवारी) ही चौबीसों घंटे विस्थापितों के साथ खड़े रहे। उन्होंने विस्थापितों और गरीबों के हक के लिए आवाज उठाई, इसीलिए उन्हें खत्म कर दिया गया।

नीतीश सरकार में पुलिस की राइफलों में जंग लगा था क्या? - पप्पू यादव

पप्पू यादव ने तंज कसते हुए कहा, "अपराधियों को आप फांसी की सजा दिलवाइए या फिर अगर वो हमारी पुलिस पर गोली चलाते हैं, तो उन्हें जवाबी कार्रवाई में मार गिराइए, इस पर किसी को आपत्ति नहीं है। लेकिन मेरे दो सीधे सवाल हैं, क्या नीतीश कुमार जी पिछले 20 सालों से अपराधियों, बालू माफियाओं और शराब माफियाओं को ही साथ लेकर चल रहे थे? अगर उनके 20 साल के सुशासन में इन पर कोई दाग नहीं लगा, तो क्या उस वक्त अपराधी पुलिस पर गोलियां नहीं चला रहे थे? क्या तब बिहार पुलिस की राइफलों में जंग लग गया था, जो आज अचानक छूट गया है?"

पप्पू यादव ने आगे कहा, "नीतीश जी ने 20 साल सरकार चलाई, लेकिन तब ऐसी गोलियां नहीं चलीं। आखिर तब एनकाउंटर क्यों नहीं हो रहे थे? आज ही अपराधी अचानक पुलिस पर गोलियां क्यों दागने लगे और आज ही पुलिस की गोलियां सीधे उनके निशाने पर कैसे लग रही हैं? यह सरकार का खुद का कंट्राडिक्शन है, क्योंकि तब भी आपकी सरकार थी और अब भी आपकी ही सरकार है। मेरा सीधा सवाल है कि बिहार में अब तक जितने भी हाफ, क्वार्टर या फुल एनकाउंटर हुए हैं, उन सभी की निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।"

पप्पू यादव ने किया मदद का ऐलान

हर्ट तिवारी के पीड़ित परिवार के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा करते हुए पप्पू यादव ने सरकार को चुनौती दी और कहा कि अगर मंत्रियों में सच में दम और हिम्मत है, तो उन्हें खोखले बयान देना बंद करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए और भरत तिवारी को शहीद घोषित किया जाए। पप्पू यादव ने कहा कि भोजपुर के एसपी और डीएसपी के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) की तुरंत जांच की जानी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि इस कथित मुठभेड़ के दौरान पटना मुख्यालय में बैठे कौन-से रसूखदार नेता और अधिकारी उनके सीधे संपर्क में थे।

दोषियों को नहीं भेजा गया जेल तो होगा बिहार बंद - पप्पू यादव

पप्पू यादव ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए या फिर पटना हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक कमेटी बनाकर इसकी निष्पक्ष समयबद्ध जांच कराई जाए। पप्पू यादव ने साफ कर दिया है कि वे 24 तारीख को बिहार के राज्यपाल से मिलकर इस पूरे मामले की एसआईटी (SIT) और मानवाधिकार आयोग से जांच कराने की मांग करेंगे। यदि दोषियों पर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा गया, तो वे जमौनियां से आरा तक पैदल पदयात्रा करेंगे और पूरा बिहार बंद कराने का काम करेंगे।

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