
भरत तिवारी और केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी
Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दलों और कई NDA नेताओं द्वारा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के बीच केंद्रीय मंत्री और HAM पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अब खुलकर इस एनकाउंटर का समर्थन किया है। जहानाबाद सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए, मांझी ने एनकाउंटर को पूरी तरह सही ठहराया, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
मांझी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी कड़ी आलोचना की। लोगों ने न सिर्फ उन्हें उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों की याद दिला दी, बल्कि उनके समाज में शिक्षा की कमी और बदहाली के आंकड़े पेश कर उन्हें जवाब दिया है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने विवादित एनकाउंटर को पूरी तरह सही ठहराया और सत्ताधारी गठबंधन तथा विपक्ष दोनों द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मांझी ने कहा, "मैं इस एनकाउंटर को पूरी तरह सही मानता हूं। अगर वह (भरत तिवारी) मानसिक रूप से अस्थिर थे, तो उनके पास रिवॉल्वर क्यों थी? उनके परिवार वालों ने उनसे रिवॉल्वर क्यों नहीं छीनी? इसका मतलब है कि उनके परिवार ने जानबूझकर उन्हें उकसाया।"
मांझी ने आगे कहा, "बिहार में पुलिस पर अक्सर हमले होते रहते हैं, पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को पीटा जाता है। क्या यह सही होता अगर वहां दो पुलिसकर्मी मारे जाते? क्या पुलिस की हत्या हो तो सब ठीक है, लेकिन पुलिस एनकाउंटर करे तो सब खराब है? अगर कोई पुलिस पर अवैध पिस्तौल तानता है, तो पुलिस को मजबूरन एनकाउंटर करना ही पड़ेगा और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।"
जीतन राम मांझी का बयान सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा भड़क गया। लोगों ने केंद्रीय मंत्री के इस बयान को बेहद शर्मनाक और घोर निंदनीय करार दिया। सोशल मीडिया एक्स पर प्रियांशु त्रिपाठी नाम के एक यूजर ने चुनावी हलफनामे का हवाला देते हुए लिखा कि जीतन राम मांझी पर खुद दंगा भड़काने (IPC 148) सहित अन्य 6 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। प्रियांशु ने तंज कसते हुए कहा, "जीतन राम मांझी माननीय मंत्री बन गए और समाज की आवाज उठाने वाला भरत तिवारी इनके लिए मानसिक अस्वस्थ गुंडा हो गया? क्योंकि देश संविधान से चल रहा है।"
बिहारी जवान नाम के एक यूजर ने महादलित समाज की शैक्षणिक स्थिति के सरकारी आंकड़े शेयर करते हुए सीधे मांझी को कटघरे में खड़ा किया। यूजर ने लिखा, "बिहार में करीब 42 लाख मुसहर हैं, लेकिन मैट्रिक पास केवल 98 हजार हैं। यानी 100 में से 98 लोग आज भी बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। भोजपुर जिले में 50 हजार की आबादी में महज 400 मैट्रिक पास हैं। दशकों से व्यवस्था का हिस्सा रहे मांझी ने अपने वोट बैंक को बदले में क्या दिया? एनकाउंटर पर ताली बजाने से पहले इस बदहाली पर बात कीजिए।"
हिन्दू मोंक नाम के यूजर ने जीतन राम मांझी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जब तक भरत तिवारी को न्याय नहीं मिलता, बीजेपी को वोट नहीं दूंगा, चाहे जितना हिन्दू-मुस्लिम कर ले। इस पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए मनोरंजन पांडे नाम के यूजर ने लिखा कि भाजपा की मजबूरी हो सकती है इन्हें ढोना, हमारी नहीं। खूनी राजनीति और फर्जी एनकाउंटर को जायज ठहराने वाले नेताओं को आने वाले चुनाव में जनता सबक सिखाएगी।
वहीं, सचिन पंडत नाम के एक यूजर ने लिखा कि भरत तिवारी एक होनहार और संवेदनशील समाजसेवी लड़का था, जिसने कोरोना और बाढ़ जैसी आपदाओं में अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों की मदद की। मांझी ने जीवन में अपने परिवार के अलावा कभी किसी को आगे नहीं बढ़ाया, इसलिए इन्हें इंसानों और समाजसेवियों की पहचान नहीं है।
Published on:
22 Jun 2026 01:28 pm
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