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ममता बनर्जी के साथ खड़े शत्रुघ्न सिन्हा, बोले- मुश्किल वक्त में सिर्फ दीदी ने दिया था साथ

Mamata Banerjee: टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी को अपना एकमात्र नेता बताते हुए उनके प्रति भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था, इसलिए वह आज भी उनके साथ खड़े हैं।
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पटना

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Rakesh Mishra

Aug 07, 2026

Shatrughan Sinha

सांसद शत्रुघ्न सिन्हा। फोटो-आईएएनएस

पटना। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना एकमात्र नेता बताते हुए सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने अभिषेक को संसद के सबसे अच्छे वक्ताओं में से भी एक बताया। अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की बड़ी जीत की भी सराहना की।

'कठिन समय में ममता बनर्जी ने दिया साथ '

जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल कांग्रेस से कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, लेकिन आप लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे हैं। इस पर आप क्या कहेंगे? इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जब मैं 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पटना से चुनाव हार गया था, तब किसी ने भी मेरा हालचाल नहीं पूछा। मैं 1996 से संसद में रहा हूं, लेकिन उस कठिन समय में कोई भी मेरे पास नहीं आया। सिर्फ ममता बनर्जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से फोन किया। इससे मुझे उनके विश्वास का एहसास हुआ।

'मजबूत व्यक्तित्व की महिला'

उन्होंने कहा कि बाबुल सुप्रियो के भाजपा छोड़ने के बाद जब आसनसोल लोकसभा उपचुनाव हुआ, तो ममता बनर्जी ने बिना मुझसे पूछे मेरे नाम की घोषणा कर दी। मैं इससे पहले कभी आसनसोल भी नहीं गया था जबकि करीब 30 साल तक भाजपा का स्टार प्रचारक रहा था। नाम घोषित करने के बाद उन्होंने मुझे इसकी जानकारी दी। उस समय मुझे उपचुनाव के बारे में भी पता नहीं था। फिर मैं आसनसोल गया, नामांकन भरा और आगे की कहानी सब जानते हैं। मैंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। तब से मैं उनके साथ काम कर रहा हूं। वह एक बड़ी नेता हैं, जमीन से जुड़ी हुई हैं, संघर्ष करने वाली और मजबूत व्यक्तित्व की महिला हैं।

'कुछ लोग घबराहट में पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले गए'

उन्होंने कहा कि जब मैं पटना से बुरी तरह चुनाव हार गया था, तब सिर्फ वे मेरे साथ खड़ी थीं। आज जब उनके लिए मुश्किल समय है, तब कई बातें हुईं। बंगाल चुनाव के दौरान एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) हुआ, जिसमें कथित गड़बड़ियों के कारण 60 से 65 लाख नाम हटाए गए। इसके बावजूद उनकी वोट हिस्सेदारी सत्ताधारी पार्टी की तुलना में केवल 3-4 प्रतिशत ही घटी। हालांकि सीटें कम मिलीं और इसके ऊपर कुछ लोग घबराहट में पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले गए। जब नाव डूबने लगती है, तो कई लोग उसे छोड़कर भाग जाते हैं।

'अच्छे वक्ताओं में से एक अभिषेक बनर्जी '

शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि अभिषेक बनर्जी मेरे नेता नहीं हैं। मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह नहीं जानता और न ही उन्हें अपना नेता मानता हूं। मेरी नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं, और कोई नहीं। बाकी सभी मेरे सहयोगी हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी एक बहुत सक्षम व्यक्ति, अच्छे इंसान और मजबूत नेता हैं। राहुल गांधी और संजय सिंह की तरह मैं मानता हूं कि अभिषेक बनर्जी संसद के सबसे अच्छे वक्ताओं में से एक हैं, जो तथ्य, सच्चाई और तर्क के साथ अपनी बात रखते हैं।

'प्रशांत किशोर बहुत सक्षम व्यक्ति'

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत पर आपका क्या कहना है? आईएएनएस के इस सवाल के जवाब में टीएमसी सांसद शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि मैं शुरू से कहता आया हूं कि प्रशांत किशोर बहुत सक्षम व्यक्ति हैं। जिस सोच के साथ मैं राजनीति में आया था, उसे उन्होंने सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। वह सोच है कि अगर अच्छे लोग राजनीति में आने को तैयार नहीं होंगे, तो उन्हें बुरे लोगों द्वारा शासित होने के लिए तैयार रहना होगा। प्रशांत किशोर पढ़े-लिखे, परिपक्व और सक्षम व्यक्ति हैं। उन्हें देश ही नहीं, दुनिया की भी अच्छी समझ है।

उन्होंने कहा कि मुझे हैरानी हुई कि उन्हें पटना में चुनाव लड़ने के बावजूद बाहरी कहा गया। जब मैं आसनसोल से चुनाव लड़ रहा था, तब मुझे भी यही कहा गया था। उस समय मैंने जवाब दिया था कि अगर इंदिरा गांधी रायबरेली से, सुषमा स्वराज कर्नाटक से, जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से और सबसे महत्वपूर्ण नरेंद्र मोदी गुजरात के बजाय वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं, तो मैं और प्रशांत किशोर क्यों नहीं लड़ सकते, जबकि हम दोनों अलग राज्य या जिले से आते हैं। जिस व्यक्ति की पार्टी पिछले साल एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, उसने भाजपा के उस घमंड को तोड़ दिया, जो बांकीपुर सीट पर अपना दबदबा मान रही थी। यह जनता की ताकत है।