
Supreme Court- photo- patrika
नई दिल्ली। सुप्रीम कार्ट ने पश्चिम बंगाल के सालबोनी में सरकारी जमीन के एक बड़े हिस्से से जुड़े कथित घोटाले के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें जारी जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता (सुमित रॉय) को पुलिस जांच में शामिल होकर सहयोग करना होगा, तब तक उनकी गिरफ्तारी स्थगित रहेगी।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी में सरकारी जमीन के कथित अवैध कब्जे और धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में सुमित रॉय को आरोपी बनाया गया है। जून महीने में मिदनापुर कोर्ट ने रॉय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद पुलिस ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर भी छापेमारी की थी। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट का मानना था कि जांच के इस चरण में हिरासत में पूछताछ की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुमित रॉय ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि उनके याचिकाकर्ता जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब भी पुलिस सुमित रॉय को गिरफ्तार करने गई, उसमें बाधा डाली गई। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री ने खुद इसमें रुकावट डाली। राज्य सरकार की दलीलों पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता खुद सहयोग करने को तैयार है, तो हिरासत में पूछताछ की इतनी जिद क्यों? इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय को राहत देते हुए गिरफ्तारी पर स्टे लगा दिया।
Updated on:
06 Aug 2026 01:29 pm
Published on:
06 Aug 2026 01:28 pm
