6 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपस में सुलझाएं झगड़ा, उस दिन को मत आने दीजिए जब कानून का रास्ता चुनना पड़े

Sunjay Kapur Family Dispute: उद्योगपति संजय कपूर के संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बयान दिया है। पूर्व CJI DY चंद्रचूड़ की मध्यस्थता के बीच कोर्ट ने कहा- बातचीत से मामला सुलझाएं और वह दिन न आने दें जब कानून का रास्ता चुनना पड़े।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Pratiksha Gupta

Aug 06, 2026

DY Chandrachud mediator, RK Family Trust, Sunjay Kapur property dispute, Supreme Court mediation report

संजय कपूर के साथ पत्नि प्रिया कपूर और उनकी मां रानी कपूर | फोटो सोर्स- ANI

Supreme Court: दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के करोड़ों के फैमिली ट्रस्ट और संपत्ति को लेकर उनकी मां रानी कपूर और पत्नी प्रिया कपूर के बीच चल रहा विवाद अब खत्म होते दिख रहा है। मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि उसे पूरी उम्मीद है कि यह पारिवारिक झगड़ा आपस में बातचीत करके शांति से सुलझ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले के विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) DY चंद्रचूड़ को सौंपी है।

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ करा रहे हैं समझौता

इस पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ बनाया है। अदालत में पेश हुई रिपोर्ट से पता चला है कि अब तक दोनों पक्षों के बीच 6 बार बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें परिवार के सभी लोगों से खुलकर बात की गई है। इस बातचीत को और अधिक सुचारू बनाने के लिए मध्यस्थता में एक सीनियर CA की मदद भी ली जा रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपस में पूरी तरह से फैसला करने के लिए 2 नवंबर 2026 तक का समय दिया है।

फीस को लेकर उठी बात तो कोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

सुनवाई के दौरान 80 वर्षीया रानी कपूर के पक्ष की ओर से ढलती उम्र और मध्यस्थता की फीस के खर्च को लेकर चिंता जाहिर की गई। रानी कपूर के वकील ने अदालत को बताया कि उनकी क्लाइंट की सेहत ठीक नहीं है, इसलिए मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा कि मध्यस्थ की फीस और अन्य खर्चों का भुगतान 'आरके फैमिली ट्रस्ट' से ही किया जाएगा। कोर्ट ने हिदायत दी कि फीस को लेकर अब किसी भी तरह की बहस की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।

'उम्मीद है लंबी मुकदमेबाजी से बचेंगे दोनों पक्ष'

अदालत ने सभी पक्षों के रुख और उनके व्यक्तिगत रूप से बैठकों में शामिल होने की सराहना की। अदालत ने दोनों पक्षों (मां और बहू) को सलाह दी कि वे खुले दिल से बातचीत की मेज पर आएं और मामले को हमेशा के लिए खत्म करें, ताकि किसी को सालों-साल अदालत के चक्कर न लगाने पड़ें। मध्यस्थता विफल होने के सवाल पर अदालत ने कहा कि यदि बातचीत विफल होती है, तो कानून के तहत आगे बढ़ने का रास्ता खुला है, लेकिन आप सब मिलकर उस दिन को मत आने दीजिए।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट अब मध्यस्थता की अगली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही इस पारिवारिक संपत्ति विवाद का अंतिम फैसला सामने आएगा।