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‘मैं 62 साल का हूं और इस मामले में पीड़ित हूं’, दोषी ठहराए जाने के बाद कोर्ट में बोले तरुण तेजपाल

Tarun Tejpal Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार देते हुए मापुसा सेशंस कोर्ट का 2021 का बरी करने वाला फैसला रद्द कर दिया।
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भारत

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Ashib Khan

Aug 06, 2026

Tarun Tejpal Bombay High Court

तरुण तेजपाल को कोर्ट ने ठहराया दोषी (Photo-IANS)

Tarun Tejpal Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल से जुड़े करीब 13 साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मापुसा की सेशंस कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें मई 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। कोर्ट ने अब तेजपाल को इस मामले में दोषी करार दिया है। 

जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की डिवीजन बेंच ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी माना है। हालांकि, कोर्ट अब अलग से तेजपाल की सजा पर सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मांगा समय

कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद तेजपाल के वकील ने सजा में नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि घटना को करीब 13 साल हो चुके हैं और इस अवधि को देखते हुए अदालत को सजा तय करते समय नरमी पर विचार करना चाहिए।

वकील ने दोषसिद्धि के आदेश पर कम से कम 8 सप्ताह की रोक लगाने की भी मांग की, ताकि तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने का मौका मिल सके। इस दौरान उन्होंने यह भी दलील दी कि यह मामला बरी किए जाने के फैसले को पलटकर दोषसिद्धि में बदला गया है और तेजपाल के खिलाफ इसके अलावा कोई अन्य मामला या एफआईआर नहीं है। फैसले के समय तेजपाल कोर्ट में मौजूद थे। 

तेजपाल ने कहा- मैं 62 साल का हूं

अदालत में अपनी बात रखते हुए तरुण तेजपाल ने कहा कि उनकी उम्र 62 साल है और वह खुद को भी इस मामले में पीड़ित मानते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी और बेटियों का जिक्र करते हुए अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की।

तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ आगे अपील कर सकते हैं और अदालत से उनके प्रति नरमी बरतने का अनुरोध किया।

सॉलिसिटर जनरल ने किया नरमी का विरोध

राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की सजा में नरमी बरतने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पीड़िता आरोपी की बेटी की उम्र की थी और इसके बावजूद तेजपाल ने अपराध किया।

तुषार मेहता ने अदालत से कड़ा संदेश देने की अपील करते हुए कहा कि जब कोई लड़की 'नहीं' कहती है तो उसका मतलब 'नहीं' ही होता है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता ने इनकार किया था, लेकिन इसके बावजूद आरोपी ने अगले दो दिनों तक कथित तौर पर अपनी कोशिश जारी रखी। राज्य की ओर से दलील दी गई कि अदालत का फैसला समाज के लिए स्पष्ट संदेश देने वाला होना चाहिए।

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