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महिला पत्रकार से दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

Tarun Tejpal Convicts: बॉम्बे हाई कोर्ट ने तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को एक महिला पत्रकार से दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 06, 2026

Tarun Tejpal rape case

तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल रेप मामले में दोषी करार (Photo: IANS)

Tehelka Rape Csse: बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के महिला पत्रकार यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें दोषी करार दिया। इससे पहले हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान सबसे अहम मुद्दा यह रहा कि क्या 'तहलका' के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल द्वारा शिकायतकर्ता को भेजा गया माफीनामा ईमेल उनके खिलाफ लगे आरोपों की स्वीकारोक्ति माना जा सकता है।

इससे पहले गोवा सरकार की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के व्यवहार का मूल्यांकन करते समय गंभीर कानूनी त्रुटि की। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला का व्यवहार एक तय पैटर्न के अनुसार होना चाहिए, जबकि ऐसा कोई निश्चित मानक नहीं होता। किसी भी पीड़िता की प्रतिक्रिया उसकी शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

मेहता ने कहा कि शिकायतकर्ता एक शिक्षित और स्वतंत्र महिला पत्रकार थीं। ऐसे में कथित घटना के बाद भी उनका अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभाते रहना स्वाभाविक था और केवल इसी आधार पर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

शिकायतकर्ता के बयानों में कथित विरोधाभासों का उल्लेख करते हुए मेहता ने कहा कि गवाही में मामूली अंतर होना सामान्य बात है और इससे किसी गवाह की सच्चाई पर असर नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि निचली अदालत ने मामले के मूल आरोपों की निरंतरता पर ध्यान देने के बजाय छोटी-छोटी विसंगतियों को आधार बनाकर गलत निष्कर्ष निकाला।

वहीं, तरुण तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने इन दलीलों का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने तेजपाल के माफीनामा ईमेल को गलत तरीके से यौन संबंध स्वीकार करने के रूप में पेश किया है। पोंडा के मुताबिक, तेजपाल ने अपने किसी भी ईमेल में आपसी सहमति से किसी शारीरिक या यौन संबंध की बात स्वीकार नहीं की। उन्होंने केवल दोनों के बीच हुई आपसी सहमति वाली यौन प्रकृति की बातचीत का जिक्र किया था, किसी शारीरिक कृत्य का नहीं।

क्या है आरोप?

गौरतलब है कि 'तहलका' की एक महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा में पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था।

इस मामले में गोवा के मापुसा स्थित सत्र अदालत ने 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच में अपील दायर की थी।

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