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‘जेन-ज़ी’ छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने पर सुप्रीम कोर्ट में विरोध

'जेन-ज़ी' छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने पर सुप्रीम कोर्ट में विरोध देखने को मिला। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 06, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के खिलाफ 'जेन-ज़ी' (Gen-Z)छात्र प्रदर्शनकारियों का विरोध प्रदर्शन देशभर में चर्चा का विषय रहा। सरकार को भी इस मामले में पीछे हटना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज हुए आपराधिक मामलों को भी वापस ले लिया गया है। हालांकि इस फैसले का सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में विरोध देखने को मिला

याचिकाकर्ता ने पूछा सवाल

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने 'जेन-ज़ी' छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने का बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया गया। याचिकाकर्ता के वकील रिज़वान अहमद ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कल जनरेशन अल्फा, बीटा और डेल्टा भी आ सकते हैं और भविष्य के आंदोलनों/विरोध प्रदर्शनों पर बुरा असर पड़ेगा। याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल पूछा कि क्या कल बॉर्डर पर मौजूद लोग ट्रैक्टर लेकर संसद आएंगे? शाहीन बाग के लोग संसद आएंगे? अगर 500 लोग संसद में घुस जाते तो कौन जानता है कि उनके पास देसी बंदूक या देसी बम नहीं होता? आयोजकों की जवाबदेही कहाँ है? जवाबदेही होनी चाहिए।"

सज़ा की नहीं, सलाह की ज़रूरत

इस मामले पर बात करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "ये लोग युवा हैं। इन्हें सलाह की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है। ताकतवर सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सख्ती से हालात बेवजह बिगड़ सकते हैं। इससे और हिंसा भड़क सकती है। इससे बचना चाहिए।"

संयम बरतना ज़रूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अगर कोई घटना होती है तो पुलिस के लिए संयम बरतना बहुत ज़रूरी है, जिससे स्थिति हाथ से न निकले। लोगों को बहुत सावधानी से काम करना होगा जिससे युवा हिंसा न करें। बेहतर तरीका यह है कि उन्हें समझाया-बुझाया जाए। सबसे बड़ी ताकत है बात सुनना, यह सुनना कि वो क्या कह रहे हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं। सीजएआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले को छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े दूसरे मामलों के साथ जोड़ दिया।

'फोर्स गोली चला देती तो क्या होता?'

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था 500 लोगों को संभालने के लिए नहीं बनी है। यह एक ज़्यादा आधुनिक फोर्स है। अगर फोर्स गोली चला देते तब क्या होता? इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "इसे कानून लागू करने वाली एजेंसी की समझदारी पर छोड़ देते हैं। उन्हें हमसे बेहतर पता है कि हालात से कैसे निपटना है। हमने आपकी बात सुन ली है। देखते हैं कि केंद्र सरकार का क्या नज़रिया है।"