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संसद में पीएम नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की बैठक, पंजाब चुनाव से पहले नए सियासी समीकरणों की चर्चा

Punjab Politics:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के फिर साथ आने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
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Prime Minister Narendra Modi and Sukhbir Singh Badal

सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो- पत्रिका

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच शुक्रवार को संसद भवन परिसर में एक अहम मुलाकात हुई, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अकाली दल का पुराना गठबंधन फिर से शुरू हो सकता है। कृषि कानूनों के विवाद के चलते छह साल पहले दोनों दल एक-दूसरे से अलग हो गए थे। हालांकि इस बैठक को लेकर किसी भी पक्ष की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन पंजाब की बदलती राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई संभावनाओं पर खुलकर चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री के सामने पंजाब के कई गंभीर मुद्दे उठाए। इनमें राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बार-बार होने वाले पेपर लीक, बढ़ता नशा और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे विषय शामिल थे। बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच आपसी रिश्तों को दोबारा जोड़ने और भविष्य में साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर भी खुलकर चर्चा हुई। जानकारों का मानना है कि दोनों पार्टियां अब पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक बार फिर साथ आने का मन बना रही हैं।

सबसे पुराने राजनीतिक साथी

भाजपा और अकाली दल करीब 25 साल तक सबसे पुराने राजनीतिक साथी रहे थे। उन्होंने 1997 से 2017 के बीच तीन अलग-अलग कार्यकाल में पंजाब में मिलकर सरकार चलाई थी। उस समय अकाली दल गठबंधन में मुख्य पार्टी थी और भाजपा सहयोगी दल। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का साथ छोड़ दिया था। हालांकि सरकार ने बाद में 2021 में उन कानूनों को वापस भी ले लिया था, फिर भी दोनों दलों के बीच दूरियां बनी रहीं।

गठबंधन से दोनों को फायदा

अलग होने के बाद दोनों ही पार्टियों को चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने शानदार जीत दर्ज की, जबकि भाजपा और अकाली दल दोनों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। यही खराब प्रदर्शन 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जारी रहा। इन लगातार चुनावी झटकों के बाद अब दोनों दलों को शायद यह महसूस होने लगा है कि अकेले लड़ने के बजाय फिर से हाथ मिलाना उनके राजनीतिक हित में होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस संभावित गठबंधन से दोनों को फायदा मिल सकता है। भाजपा के पास शहरों में मजबूत संगठन है, जबकि अकाली दल के पास गांवों और पारंपरिक सिख मतदाताओं का बड़ा समर्थन आधार है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया

हालांकि, अगर इस बार यह गठबंधन दोबारा बनता है, तो इसके नियम और शर्तें पहले जैसी नहीं होंगी। सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा बराबरी के दर्जे पर गठबंधन चाहती है, जिससे सीटों के बंटवारे और नेतृत्व को लेकर बातचीत काफी चुनौतीभरी हो सकती है। इस मुलाकात के बाद आप की प्रतिक्रिया भी तुरंत सामने आ गई। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या भाजपा और अकाली दल एक बार फिर साथ आ रहे हैं, जिससे इस बैठक के राजनीतिक असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गठबंधन औपचारिक रूप से बनता है, तो यह 2027 के चुनावों में पंजाब के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल देगा। हालांकि, दोनों दलों के लिए कृषि कानूनों के समय पैदा हुए अविश्वास को खत्म करना और सीटों का सही तालमेल बिठाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।