Rishushree tender scam: बिहार टेंडर घोटाले में कार्रवाई करते हुए स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास, पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी मुमुक्षु चौधरी और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। इन तीनों के पास से कुल 11.53 करोड़ बरामद हुआ था, जिसमें से अकेले तारिणी दास के ठिकाने से 8.53 करोड़ मिले थे।

Bihar Tender Scam: बिहार के हाई-प्रोफाइल टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अफसरों में भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास, वित्त विभाग के पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी मुमुक्षु चौधरी और नगर विकास विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। इन तीनों अधिकारियों के पास भ्रष्टाचार के जरिए जमा की गई 11.53 करोड़ रुपये बरामद होने के बाद से एजेंसियां इन पर नजर रख रही थीं। बुधवार को SVU के ADG पंकज कुमार ने इन तीनों अधिकारियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
SVU द्वारा गिरफ्तार बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 को अपने पद से रिटायर हुए थे। विभाग में उनका इतना दबदबा था कि रिटायरमेंट के ठीक नौ दिन बाद 9 नवंबर 2024 को सरकार ने उन्हें दो साल का सर्विस एक्सटेंशन दे दिया। लेकिन, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेंडर में गड़बड़ी की योजना की कड़ियों को जोड़ा तो तारिणी दास का नाम सबसे आगे आया।
प्रवर्तन निदेशालय ने जब मार्च 2025 में तारिणी दास के ठिकानों पर छापेमारी की, तो 8.53 करोड़ रुपये कैश बरामद हुआ। इसके बाद सरकार ने तुरंत उनका एक्सटेंशन कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया। उन पर गैर-कानूनी तरीके से टेंडर मंजूर करने के लिए रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत SVU पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ FIR (FIR नंबर 25/25) दर्ज की गई थी।
विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार मुमुक्षु चौधरी ने वित्त विभाग में संयुक्त सचिव और सीतामढ़ी व सहरसा में टाउन कमिश्नर के तौर पर काम किया है। आरोप है कि टाउन कमिश्नर रहते हुए चौधरी ने नियमों को ताक पर रखकर घोटाले के मास्टरमाइंड रिशु श्री की शेल कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके दिए, जिसके बदले में उन्होंने भारी रिश्वत ली। जब ED ने उनके ठिकानों पर मार्च 2025 में छापेमारी की थी, तो 2 करोड़ रुपये कैश बरामद हुए थे। पटना के SVU पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ FIR (FIR नंबर 24/25) दर्ज की गई थी।
गिरफ्तार किए गए तीसरे अधिकारी उमेश कुमार सिंह हैं, जो शहरी विकास और आवास विभाग के तहत BUIDCO में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर तैनात थे। सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कॉन्ट्रैक्टरों और बिचौलियों के साथ मिलकर विभाग के भीतर एक सिंडिकेट बनाया था। वे रिशु श्री की कंपनी और अन्य पसंदीदा एजेंसियों के सरकारी बिल पेमेंट पास करने के बदले एक तय कमीशन वसूलते थे। यह तय रकम सीधे सिंह की जेब में जाती थी। छापेमारी के दौरान उनके पास से 1 करोड़ कैश बरामद हुआ था।
इस टेंडर घोटाले का असली मास्टरमाइंड रिशु रंजन सिंह उर्फ रिशु श्री है। रिशु कभी स्क्रैप कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता था, तेजी से बिहार की नौकरशाही में सबसे बड़ा पावर ब्रोकर बन गया। उसके प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2021 में उसे औपचारिक रूप से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था। रिशु श्री पर बिहार में कई सीनियर IAS अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। वह अपनी मर्जी से फाइलें इधर-उधर करवाता था और सचिवालय में उसके साथ किसी बड़े अधिकारी जैसा व्यवहार किया जाता था।
स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने रिशु श्री से जुड़े इस टेंडर घोटाले में अब तक पांच बड़ी गिरफ्तारियां की हैं। मुख्य आरोपी रिशु श्री को सबसे पहले 28 मई को पटना के मीठापुर स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर बेउर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद रिशु श्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया और अब तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा सरकार ने इस मामले में पहले ही दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को सस्पेंड कर दिया है।