पटना

अक्टूबर में जेल, दिसंबर में नई पोस्टिंग और अब विजिलेंस की रडार पर; बिहार टेंडर स्कैम में फंसे IAS कौन?

IAS Sanjeev Hans in Bihar Tender Scam: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में 1997 बैच के IAS अधिकारी संजीव हंस एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। आइए जानते हैं कि संजीव हंस कौन हैं, जिन्हें ऊर्जा विभाग में स्मार्ट मीटर और अन्य टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप में अक्टूबर 2024 में जेल भेजा गया था।
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Jun 11, 2026
ias sanjeev hans in bihar tender scam
IAS संजीव हंस (photo - FB @DistrictCollectors)

Bihar Tender Scam: बिहार की स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री से जुड़े हाई-प्रोफाइल टेंडर घोटाले मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। अब तक इस मामले में तीन अफसर समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जिसके बाद अब जांच एजेंसियों की नजर 1997 बैच के सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस पर है। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की टीम उनकी तलाश कर रही हैं, लेकिन अभी तक उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया है।

पंजाब से पटना तक… कैसा रहा संजीव हंस का सफर?

19 अक्टूबर 1973 को पंजाब में जन्मे संजीव हंस के लिए सिविल सर्विस कोई नई बात नहीं थी। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा खुद प्रशासनिक सेवा में थे, इसलिए ब्यूरोक्रेसी उनके खून में थी। वे ऐसे माहौल में पले-बढ़े जहां पढ़ाई-लिखाई को प्राथमिकता दी जाती थी। संजीव ने सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की और बाद में देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास करके 1997 में बिहार कैडर के IAS अधिकारी बने।

अपने पूरे करियर में संजीव हंस ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) से लेकर जल संसाधन और ऊर्जा विभागों के प्रधान सचिव तक कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। 2008 में उन्हें 'सत्येन मैत्रा मेमोरियल नेशनल लिटरेसी अवार्ड' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, राज्य स्तर पर चुनाव प्रबंधन से लेकर जन स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उनके बेहतरीन काम के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले।

फिर शुरू हुआ विवादों का सिलसिला

लेकिन, फिर समय बदला और संजीव हंस के नाम के साथ विवादों, आरोपों और घोटालों की एक सूची जुड़ती गई, जिसने आखिरकार उनके पूरे करियर पर दाग लगा दिया। आज हालात ऐसे हैं कि जो अधिकारी कभी सरकार के सबसे भरोसेमंद लोगों में गिने जाते थे, वे अब टेंडर घोटाले में इतने बुरी तरह फँस गए हैं कि जांच एजेंसियां उनकी तलाश कर रही हैं।

अक्टूबर 2024 में हुए गिरफ्तार

संजीव हंस का नाम एक बड़े विवाद में तब सामने आया जब ऊर्जा विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट और अन्य टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप लगे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में दखल दिया और मनी लॉन्ड्रिंग एवं आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच शुरू की। जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया। जिसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने अक्टूबर 2024 में संजीव हंस को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद, बिहार सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया और उन्हें न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया।

एक साल बाद अक्टूबर 2025 में आए जेल से बाहर

लगभग एक साल जेल में बिताने के बाद पटना हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में संजीव हंस को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि वे देश छोड़कर नहीं जा सकते और जांच तथा बाद की सुनवाई में पूरा सहयोग करेंगे। जमानत मिलने के कुछ ही समय बाद बिहार सरकार ने उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया और 30 दिसंबर 2025 को उन्हें राजस्व बोर्ड में अतिरिक्त सदस्य के तौर पर तैनात किया गया।

संजीव हंस को अब क्यों ढूंढ रही पुलिस?

शुरुआत में ऐसा लगा कि राजस्व बोर्ड में नई पोस्टिंग के बाद संजीव हंस की मुश्किलें कम हो गई हैं। हालांकि, स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा बीते दिनों की गई कार्रवाई ने उनकी मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। टेंडर घोटाले में पहले ठेकेदार रिशु श्री और उसके सहयोगी संतोष कुमार की गिरफ़्तारी हुई, फिर तीन अधिकारी तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद जांच की कड़ियां अब संजीव हंस से जुड़ रही हैं। फिलहाल, जांच एजेंसियां ​​पूछताछ के लिए संजीव हंस की तलाश कर रही हैं, लेकिन उनके ठिकाने के बारे में कोई सुराग न मिलने से कई नए सवाल उठ रहे हैं।

Updated on:
11 Jun 2026 05:36 pm
Published on:
11 Jun 2026 05:36 pm
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