
लोक गायिका मनीषा क्षरिवास्तव (फोटो- मनीषा श्रीवास्तव X)
Bihar Folk Singer Manisha Srivastava: संस्कृति मंत्रालय ने साल 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, अकादमी रत्न, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार बिहार के पांच कलाकारों को इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें बिहार की युवा लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव भी शामिल हैं, जिन्होंने 'कजरी' और 'सोहर' की अपनी सुरीली गायकी से दर्शकों का मन मोह लिया है। उन्हें प्रतिष्ठित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार 2025' के लिए चुना गया है।
इस साल के पुरस्कार विजेताओं के बारे में फैसला नई दिल्ली में 22 से 26 मार्च तक हुई संगीत नाटक अकादमी की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया। इस साल देश भर से अलग-अलग कला विधाओं से जुड़े कुल 106 प्रतिभाशाली कलाकारों को इन सम्मानों के लिए चुना गया है। बिहार से वरिष्ठ अभिनेता सुरेश कुमार हज्जू, थिएटर निर्देशक शिव नारायण झा और लोक कलाकार महेंद्र राम को राष्ट्रीय कला पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं, युवा थिएटर कलाकार रोहित चंद्र और लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव को युवा पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार मिलेगा।
इस राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी खुशी और आभार व्यक्त करते हुए मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन के सबसे यादगार और खास पलों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह समृद्ध भोजपुरी लोक संस्कृति और संगीत और साथ ही उन लाखों श्रोताओं का सम्मान है जो इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। वह यह पुरस्कार भोजपुरी संगीत की इस असली शैली से जुड़े हर कलाकार और श्रोता को समर्पित करती हैं।
बिहार के रोहतास जिले की रहने वाली मनीषा श्रीवास्तव को बचपन से ही लोक कला और संगीत से गहरा लगाव रहा है। घर के माहौल और आस-पास की चीज़ों ने उन्हें लोक संगीत की जड़ों से जोड़े रखा। मनीषा बताती हैं कि जब वह छठी कक्षा में थीं, तब उनके दादाजी ने संगीत के प्रति उनके जुनून को पहचाना और उन्हें इस रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके बाद, 2007 में उन्होंने एक बाल कलाकार के तौर पर भोजपुरी लोक संगीत की दुनिया में कदम रखा। मनीषा के सफर की एक खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और संगीत के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाया। जहां एक तरफ उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और एक इंजीनियर के तौर पर अपनी पहचान बनाई, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने प्रयागराज की प्रतिष्ठित 'प्रयाग संगीत समिति' से संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग भी ली।
मनीषा श्रीवास्तव ने अपनी पारंपरिक लोक विरासत को कभी भी गुमनाम नहीं होने दिया। उन्होंने न केवल पारंपरिक भोजपुरी लोक विधाओं जैसे बटोहीया, कजरी, सोहर, चैता और शादी के पारंपरिक गीतों को जीवित रखा है, बल्कि उन्हें एक प्रतिष्ठित मंच भी प्रदान किया है। संगीत के प्रति अपने लगाव और सामाजिक-सांस्कृतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने कृषि विभाग के सहयोग से 'मोटे अनाज (मिलेट) की खेती' पर केंद्रित विशेष गीत भी तैयार किए। इसके अलावा, बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की वीरता के सम्मान में उनके गाए एक विशेष गीत को काफी सराहना मिली है।
Updated on:
11 Jun 2026 03:07 pm
Published on:
11 Jun 2026 03:03 pm
बड़ी खबरें
View Allराज्य
ट्रेंडिंग
