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7 साल तक बच्ची के फेफड़े में फंसी रही पेन की कैप, डॉक्टर टीबी और अस्थमा का करते रहे इलाज, काटना पड़ा एक-तिहाई हिस्सा

Pen Cap in Lung: मुंबई की 10 वर्षीय बच्ची के फेफड़े में 7 साल तक पेन की कैप फंसी रही। डॉक्टरों ने पहले टीबी और अस्थमा समझकर इलाज किया। बाद में सर्जरी कर फेफड़े का एक हिस्सा निकालना पड़ा।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jul 27, 2026

Mumbai news

बच्ची के फेफड़े का काटना पड़ा एक-तिहाई हिस्सा (AI Image)

Mumbai News: मुंबई के धारावी की रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची के साथ एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी चौंका दिया। बच्ची के फेफड़े में सात साल से अधिक समय तक पेन की कैप फंसी रही, लेकिन कई डॉक्टरों ने उसे पहले टीबी (Tuberculosis) और फिर अस्थमा का मरीज मानकर इलाज किया। आखिरकार सही जांच में सच्चाई सामने आई और डॉक्टरों को संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित फेफड़े का एक हिस्सा निकालना पड़ा।

लगातार खांसी और वजन घटने पर शुरू हुआ इलाज

बच्ची की मां मैमुना शेख ने बताया कि बेटी को लगातार खांसी आ रही थी और उसका वजन तेजी से घट रहा था। शुरुआती जांच के बाद कई डॉक्टरों ने इसे संक्रमण मानते हुए एंटीबायोटिक दवाएं दीं। बाद में उसे बीएमसी के एक अस्पताल में भेजा गया, जहां थूक (बलगम) की जांच में टीबी की पुष्टि नहीं होने के बावजूद लक्षणों के आधार पर टीबी की दवाएं शुरू कर दी गईं।

डॉक्टर बोले- बीमारी का पता लगाना आसान नहीं था

मामले से जुड़े एक डॉक्टर के अनुसार, पेन की कैप जिस जगह फंसी हुई थी, वहां तक पहुंचना और उसकी पहचान करना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा कि मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज किया गया।

टीबी का पूरा इलाज होने के बावजूद बच्ची की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिवार उसे एक निजी अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे अस्थमा का मरीज बताया और राहत के लिए इनहेलर दिया। लेकिन इसके बाद भी बच्ची की परेशानी लगातार बनी रही।

सीटी स्कैन और ब्रोंकोस्कोपी में सामने आई सच्चाई

बाद में बच्ची को परिवार वाले निजी अस्पताल ले गए। यहां पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला ने बताया कि सीटी स्कैन में फेफड़े का एक हिस्सा सिकुड़ा हुआ दिखाई दिया, जबकि बाकी हिस्सा सामान्य था। इससे उन्हें फेफड़े में किसी बाहरी वस्तु के फंसे होने का संदेह हुआ। इसके बाद ब्रोंकोस्कोपी जांच की गई।

ब्रोंकोस्कोपी के दौरान डॉक्टरों ने देखा कि पेन की कैप बाएं फेफड़े के निचले हिस्से में गहराई में फंसा हुआ था। इसे निकालने के लिए ईएनटी विशेषज्ञों की मदद ली गई और अधिक एनेस्थीसिया देकर सावधानीपूर्वक कैप बाहर निकाली गई। ढक्कन बाहर निकलते ही बच्ची के निमोनिया और सांस लेने की तकलीफ में काफी सुधार देखा गया।  

फेफड़े का एक-तिहाई हिस्सा काटना पड़ा

डॉ. खोसला के मुताबिक, पेन की कैप निकलते ही बच्ची की हालत में तेजी से सुधार होने लगा। दो से तीन सप्ताह के भीतर निमोनिया काफी हद तक कम हो गया और फेफड़े का स्वस्थ हिस्सा फिर से काम करने लगा।

हालांकि डॉक्टरों ने एक महीने तक इंतजार किया कि प्रभावित हिस्सा दोबारा सामान्य हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 7 सालों के लंबे समय तक ढक्कन फंसे रहने की वजह से वहां गंभीर इंफेक्शन हो चुका था और फेफड़े के ऊतक हमेशा के लिए नष्ट हो चुके थे। इस कारण आखिरकार फेफड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा सर्जरी करके निकालना पड़ा। डॉक्टरों का कहना है कि सफल सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर है और वह भविष्य में सामान्य जीवन जी सकेगी।

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