पटना

NEET छात्रा रेप-हत्या केस में सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी, सम्राट चौधरी ने क्यों कही ये बात?

Patna Hostel Case:सम्राट चौधरी ने कहा कि जब NEET छात्रा के रेप और मौत के मामले में पीड़ित परिवार का पुलिस जांच से भरोसा उठ गया, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मामला CBI को सौंप दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जांच में दखल नहीं देगी।
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Feb 01, 2026
Samrat Chaudhary
बिहार डिप्टी CM सम्राट चौधरी (IANS)

Patna Hostel Case: पटना में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा के कथित रेप और मौत ने बिहार की राजनीति और प्रशासन को हिला दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी गई है। इस फैसले के बाद, बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि सरकार इस मामले में दखल नहीं देगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि CBI एक स्वतंत्र एजेंसी है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए।

सरकार जनता की भावनाओं के साथ - सम्राट चौधरी

रविवार को मीडिया से बात करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि इस मामले में पहले से ही जांच चल रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार और कई राजनीतिक दल लगातार जांच एजेंसियों पर अविश्वास जता रहे थे। उन्होंने कहा, "सरकार जनता की भावनाओं के साथ है, लोगों की उम्मीदों के साथ है। हम चाहते हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले, और इसके लिए एक निष्पक्ष जांच जरूरी है।"

उपमुख्यमंत्री ने साफ किया कि इसीलिए सरकार ने मामला CBI को सौंपने का फैसला किया, ताकि किसी भी शक की गुंजाइश न रहे। सम्राट चौधरी ने साफ तौर पर कहा कि सरकार CBI जांच में दखल नहीं देगी। उन्होंने कहा कि CBI पूरी तरह से स्वतंत्र एजेंसी है और जांच की दिशा वही तय करेगी। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि CBI को सौंपे गए कई पुराने मामले अभी तक क्यों नहीं सुलझे हैं, तो उपमुख्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया और चुप रहे।

SIT और CID जांच से असंतोष

पिछले 23 दिनों में इस मामले में तीसरी जांच एजेंसी शामिल हुई है। शुरुआत में बिहार पुलिस मामले की जांच कर रही थी, फिर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई और फिर जांच में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की एंट्री हुई। इसके बावजूद, पीड़ित परिवार इन जांचों से संतुष्ट नहीं था और पुलिस पर लापरवाही और मामले को दबाने की कोशिश के आरोप लगा रहा था। इसके बाद, अब मामला CBI को सौंप दिया गया है।

इस बीच, शुरुआती जांच में कथित लापरवाही के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया, जिससे स्थानीय पुलिस द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर सवाल और गहरे हो गए। इससे सरकार पर जांच एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का दबाव बढ़ गया।

जांच CBI को क्यों दी गई?

  • पीड़ित के माता-पिता ने सीधे SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) और CID (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) पर केस को दबाने और मुख्य आरोपी को बचाने का आरोप लगाया।
  • पुलिस की घोर लापरवाही: केस की शुरुआत में ही दो पुलिस अधिकारियों को लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया था, जिससे स्थानीय पुलिस की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा।
  • 11 जनवरी को छात्र की मौत के बाद मामला और भी जटिल होता गया। 20 दिनों के अंदर दो एजेंसियां ​​(SIT और CID) बदली गईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
  • DGP से मुलाकात का असर: जब शुक्रवार को पीड़ित परिवार सीधे DGP विनय कुमार से मिला और अपनी शिकायतें बताईं, तो सरकार को एहसास हुआ कि स्थिति हाथ से निकल रही है।

CBI जांच में आगे क्या होगा?

गृह विभाग ने दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत CBI जांच की सिफारिश की है। केंद्र सरकार का कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अब इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी करेगा। इसके बाद, CBI पटना पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर एक नया मामला दर्ज करेगी। CBI सभी संदिग्धों, गिरफ्तार आरोपियों, हॉस्टल से जुड़े लोगों, अस्पताल के कर्मचारियों, परिवार के सदस्यों और संबंधित पुलिस अधिकारियों के नए बयान दर्ज करेगी। बिहार पुलिस अब तक इकट्ठा किए गए सभी 25 DNA सैंपल, डिजिटल सबूत और मोबाइल लोकेशन डेटा भी CBI को सौंप देगी, जिनकी दोबारा जांच की जाएगी ताकि कोई भी सच्चाई छिपी न रहे।

केस में अब तक क्या-क्या हुआ

  • 26 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026: छात्रा जहानाबाद में अपने घर पर थी।
  • 5 जनवरी: छात्रा अपने घर से पटना आई।
  • 6 जनवरी: छात्रा अपने कमरे में बेहोश मिली।
  • 6 जनवरी: एक प्राइवेट अस्पताल में जांच के बाद उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया।
  • 7 जनवरी: दूसरे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने के बाद छात्रा कोमा में चली गई।
  • 11 जनवरी: मेदांता अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
  • 12 जनवरी: परिवार वालों ने कारगिल चौक पर विरोध प्रदर्शन किया।
  • 15 जनवरी: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई।
  • 16 जनवरी: एक SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई गई।
  • 17 जनवरी: मकान मालिक मनीष को गिरफ्तार किया गया।
  • 26 जनवरी: जांच का जिम्मा CID टीम को सौंपा गया।
  • 27 जनवरी: गर्दनीबाग में संदिग्धों का DNA टेस्ट किया गया।
Updated on:
01 Feb 2026 06:01 pm
Published on:
01 Feb 2026 06:01 pm