पटना

“ठीक हुआ, ये लोग बहुत फड़फड़ा रहे थे…” लालू यादव के पतन की शुरुआत की कहानी; शिवानंद तिवारी ने 23 साल बाद खोला राज

शिवानंद तिवारी ने 2003 में पटना के गांधी मैदान में हुई “लाठी रैली” का जिक्र करते हुए लालू प्रसाद के राजनीतिक पतन की कहानी साझा की।

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Apr 08, 2026
लालू प्रसाद यादव। (ANI)

समाजवादी नेता और लालू प्रसाद के मित्र शिवानंद तिवारी ने बुधवार को तेजस्वी यादव और राजबल्लभ यादव की मुलाकात की चर्चा करते हुए 23 साल पुराना राज खोला है। शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि तेजस्वी यादव अपनी पूरी टीम के साथ नवादा पहुंचे, जहां उन्होंने राजबल्लभ यादव के बेटे के निधन पर संवेदना व्यक्त की। राजबल्लभ यादव, राबड़ी देवी के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि, वर्तमान में उनकी पत्नी जदयू की विधायक हैं। पिछले चुनाव में तेजस्वी यादव ने उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा था, लेकिन उनका प्रत्याशी हार गया और राजबल्लभ यादव की पत्नी चुनाव जीत गईं।

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लाठी रैली पर विवाद

जब लालू यादव की सरकार थी, तब 2003 में गांधी मैदान में “लाठी रैली” आयोजित की गई थी। पता नहीं उन्हें इसकी सलाह किसने दी थी। रैली की घोषणा से पहले मैंने इसका जोरदार विरोध किया था—लोकतंत्र में लाठी रैली का क्या मतलब? लेकिन “लाठी में तेल पियावन” के नारे के साथ लालू जी ने गांधी मैदान में लाठी रैली की घोषणा कर दी और आखिरकार यह रैली आयोजित भी हुई।

लाठी रैली से कमजोर जातियां हुईं दूर

रैली के एक-दो दिन बाद मुख्यमंत्री आवास में राजबल्लभ जी से मुलाकात हुई। मैंने उनसे पूछा कि लाठी रैली से पार्टी को क्या हासिल हुआ। उन्होंने कहा, “क्या हासिल हुआ, यह तो मैं नहीं जानता, लेकिन इसका नुकसान जरूर बता सकता हूँ।” मैंने उनसे विस्तार से बताने को कहा। इस पर उन्होंने कहा, “जब हम लोगों—यानी यादवों—ने लाठी उठाई, तो हमारे साथ जुड़ी कई कमजोर जातियां हमसे दूर हो गईं।”

अगले दिन मैंने लालू यादव से कहा कि रैली के बाद पार्टी की बैठक होनी चाहिए और लाठी रैली से क्या फ़ायदा और नुक़सान हुआ इस पर विचार होना चाहिए। लालू यादव ने कहा कि 'नुक़सान'! नुक़सान क्या हुआ ? तब मैंने राज बल्लभ जी का आकलन उनको बताया तो उनका जवाब था:

ठीक हुआ, ये लोग बहुत फड़फड़ा रहे थे...

“ठीक हुआ, ये लोग बहुत फड़फड़ा रहे थे।" लालू जी की गिरावट की वहीं से शुरुआत हुई। मंडल कमीशन की वजह से अपर कास्ट लालू जी के विरुद्ध था ही। कुर्मी और कोईरी जैसी मध्य जातियां यादव के साथ कभी नहीं रहीं और अति पिछड़ों को तो ख़ुद लाठी से भगा दिया गया जो आज तक लालू जी के साथ नहीं आ पायीं।

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Published on:
08 Apr 2026 09:41 pm
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