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बिहार में नदी किनारे दौड़ेंगी गाड़ियां, 2030 तक बनेंगे 3 नए गंगा पथ; मिनटों में तय होगा घंटों का सफर

Bihar Ganga Path Project: बिहार में कुल 16,465.41 करोड़ रुपये की लागत से तीन नए गंगा पथ का निर्माण होगा। इसे पूरा करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। जिसके तहत कुल कुल 118.45 किलोमीटर सड़क का निर्माण होगा। इन सड़कों के बनने से संकरे रास्तों पर लगने वाले भीषण जाम से लोगों को छूटकारा मिल जाएगा।

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पटना

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Anand Shekhar

May 26, 2026

Bihar Ganga Path Project

जेपी गंगा पथ पटना

Bihar Ganga Path Project:बिहार में बेहतर यातायात और शहरों को जाम के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में गंगा नदी के किनारे-किनारे आधुनिक और हाई-स्पीड सड़क कनेक्टिविटी के लिए तीन गंगा पथ परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई है। इसके तहत राज्य में कुल 118.45 किलोमीटर लंबाई के तीन नए गंगा एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे, जिन्हें वर्ष 2030 तक पूरी तरह से कंप्लीट करने का लक्ष्य रखा गया है।

इन तीनों प्रोजेक्ट्स पर बिहार सरकार कुल 16,465.41 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करने जा रही है। सरकार का दावा है कि इन सड़कों के बनने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का फासला बेहद कम हो जाएगा। मुसाफिरों का घंटों का सफर मिनटों में तय होगा, जिससे न सिर्फ ईंधन और समय की बचत होगी, बल्कि राज्य में व्यापार और पर्यटन को भी गति मिलेगी।

सुल्तानगंज से भागलपुर तक 40.8 किमी का नया फोरलेन

इस परियोजना के तहत अंग प्रदेश यानी भागलपुर क्षेत्र की सूरत बदलने आ रही है। सुल्तानगंज से भागलपुर तक गंगा नदी के समानांतर लगभग 40.8 किलोमीटर की लंबाई में एक शानदार फोरलेन गंगा पथ का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 4,849.83 करोड़ रुपये तय की गई है और सरकार ने इसे अगले 4 वर्षों के भीतर पूरा करने का निर्देश जारी किया है।

भागलपुर और सुल्तानगंज के बीच की मौजूदा सड़क पर गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। सबसे बदतर स्थिति विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान होती है, जब देश-विदेश से आने वाले लाखों कांवड़िए सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर के लिए रवाना होते हैं। उस समय पूरा इलाका ट्रैफिक जाम से चोक हो जाता है। यह नया फोरलेन गंगा पथ बनने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रावणी मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बिना किसी रुकावट के सुपरफास्ट और सुगम यातायात की सुविधा मिल सकेगी।

मुंगेर में बनेगा 42 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे

गंगा किनारे रफ्तार भरने वाली दूसरी परियोजना मुंगेर जिले के लिए प्रस्तावित की गई है। इसके तहत साफियाबाद से बरियारपुर होते हुए घोरघट तक करीब 42 किलोमीटर लंबा नया गंगा पथ निर्मित किया जाएगा। इस परियोजना पर कुल 5,119.8 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इसे भी आगामी चार सालों में बनाकर तैयार करने का डेडलाइन तय है।

मुंगेर, बरियारपुर और घोरघट का यह पूरा इलाका व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन बेहतर सड़कों के अभाव में यहां मालवाहक गाड़ियों और आम यात्रियों को रोजाना घंटों रेंगना पड़ता है। गंगा नदी के किनारे बनने वाली इस नई सड़क से न केवल मुंगेर और उसके आसपास के टाल व दियारा क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि किसानों, सब्जी उत्पादकों और व्यापारियों को अपनी फसल व सामान पटना या अन्य बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को सीधा बढ़ावा मिलेगा।

पटना मरीन ड्राइव का दीघा से कोईलवर तक विस्तार

इसके अलावा पटना की लाइफलाइन और युवाओं की पसंदीदा सड़क बन चुके जेपी गंगा पथ (पटना मरीन ड्राइव) का भी अब विस्तार होने जा रहा है। इसके तहत जेपी गंगा पथ को दीघा से आगे बढ़ाते हुए सीधे कोईलवर (बिहटा) तक ले जाया जाएगा। लगभग 35.65 किलोमीटर लंबे इस नए फोरलेन मरीन ड्राइव विस्तार पर सबसे ज्यादा यानी 6,495.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वर्तमान में पटना से बिहटा, मनेर या आरा-कोईलवर जाने वाले लोगों को दानापुर और मनेर के संकरे रास्तों पर लगने वाले भीषण महाजाम से जूझना पड़ता है, जिससे महज 30-40 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2 से 3 घंटे बर्बाद हो जाते हैं। इस नए गंगा पथ के बनने के बाद, लोग पटना के पीएमसीएच या गांधी मैदान से सीधे मरीन ड्राइव चढ़ेंगे और बिना किसी सिंगल ट्रैफिक सिग्नल के मात्र 25-30 मिनट में बिहटा और कोईलवर पहुंच जाएंगे। यह सड़क राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वाहनों के दबाव को पूरी तरह सोख लेगी।

जाम और समय की बर्बादी से मिलेगी मुक्ति

बिहार सरकार के सड़क निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सड़कों का डिजाइन पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड और आधुनिक तकनीकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नदी के किनारे बनने के कारण इन रास्तों पर कोई रिहायशी रुकावट या क्रॉसिंग नहीं होगी, जिससे गाड़ियां 80 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बिना रुके दौड़ सकेंगी।

इसके अलावा एक्सप्रेस-वे के किनारे नए लॉजिस्टिक पार्क, होटल, रेस्टोरेंट और टूरिस्ट स्पॉट विकसित होने की संभावनाएं हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साल 2030 तक जब ये तीनों परियोजनाएं पूरी तरह चालू हो जाएंगी।