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Ancient Shiva temple: 700 साल पुराना बेमेतरा का शिव मंदिर, नागर शैली की अद्भुत विरासत, हर चार महीने में बदलता है शिवलिंग का रंग

Shiva temple: सहसपुर में 700 साल पुराना शिव मंदिर नागर शैली की अद्भुत मिसाल है। फणिनागवंशी काल के इस मंदिर में हर चार महीने शिवलिंग का रंग बदलने की मान्यता है।
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Aug 17, 2026
Ancient Shiva temple
700 साल पुराना बेमेतरा का शिव मंदिर (photo Patrika)

Bemetara Shiva temple: बेमेतरा जिले के ग्राम सहसपुर में स्थित 700 वर्ष पुराना शिव मंदिर अपनी उत्कृष्ट नागर शैली और चमत्कारिक शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। बेमेतरा से लगभग 35 किमी दूर बजरंग बली मंदिर के पास स्थित यह पूर्वाभिमुख मंदिर 13वीं-14वीं शताब्दी के फणिनागवंशी काल का माना जाता है।

हर चार महीने में रंग बदलता है शिवलिंग

मंदिर के पुजारी प्रकाश नारायण शर्मा के अनुसार, गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग का रंग हर चार महीने में प्राकृतिक रूप से बदलता है। यह सदियों से चली आ रही अलौकिक घटना श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां विशाल मेला लगता है। देश-विदेश से हजारों कांवडि़ए पदयात्रा कर आते हैं और पवित्र जल से जलाभिषेक कर मनोकामना मांगते हैं।

नागर शैली की अनूठी वास्तुकला

यह मंदिर मध्य भारतीय नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें गर्भगृह, अंतराल और मण्डप तीन भाग हैं। शिखर पर आमलक और कलश स्थापित हैं। मण्डप 16 नक्काशीदार स्तंभों ‘षोडशखंभी’ पर टिका है। हर स्तंभ पर सूक्ष्म नाग आकृतियां उकेरी गई हैं। गर्भगृह के प्रवेश द्वार के ललाट बिम्ब में चतुर्भुजी शिव, दाईं ओर ब्रह्मा और बाईं ओर विष्णु की मूर्ति है। नीचे नवग्रहों का अंकन है। जलाधारी पर शिवलिंग स्थापित है और गर्भगृह की छत समृद्ध कलाकृतियों से सजी है। बाहरी भित्तियों में नटराज शिव, सूर्य देव और नृत्त गणपति की मूर्तियां लगी हैं, जो शिल्प कला का बेहतरीन नमूना हैं। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां लगने वाला मेला बेमेतरा जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

फणिनागवंशी राजवंश से जुड़ा इतिहास

संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कवर्धा के प्रतापी फणिनागवंशी राजाओं के शासनकाल में हुआ था। विभाग द्वारा इस धरोहर के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब

सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर सहसपुर शिव मंदिर में विशेष आयोजन और मेले का आयोजन होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कांवड़िए पदयात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मनोकामना पूर्ति की आस्था के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा ने इस मंदिर को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाया है। सावन के दौरान मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से भर जाता है।

जहां इतिहास और आस्था एक साथ दिखाई देते हैं

छत्तीसगढ़ की धरती पर अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो सिर्फ पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य परंपरा के जीवंत दस्तावेज भी हैं। बेमेतरा जिले के ग्राम सहसपुर का प्राचीन शिव मंदिर भी ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर है। बेमेतरा जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर, बजरंग बली मंदिर के पास स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीनता, वास्तुकला और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर को करीब 700 वर्ष पुराना माना जाता है और इसका निर्माण 13वीं-14वीं शताब्दी के फणिनागवंशी काल से जोड़ा जाता है।

16 नक्काशीदार स्तंभों पर टिका है मंडप

सहसपुर मंदिर की खासियत केवल इसकी धार्मिक मान्यताएं नहीं हैं। इसकी वास्तुकला भी इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। मंदिर को मध्य भारतीय नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसकी संरचना मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित है—

गर्भगृह
अंतराल
मंडप

मंदिर का मंडप 16 नक्काशीदार स्तंभों पर टिका है, जिसे वास्तुकला की दृष्टि से ‘षोडशखंभी’ मंडप कहा जाता है। इन स्तंभों पर बेहद बारीकी से नाग आकृतियां उकेरी गई हैं। पत्थरों पर की गई यह नक्काशी उस दौर के शिल्पकारों की तकनीकी दक्षता और कलात्मक दृष्टि को दर्शाती है।

Updated on:
17 Aug 2026 12:39 pm
Published on:
17 Aug 2026 12:38 pm
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