
क्रिश्चियन फोरम अध्यक्ष अरुण पन्नालाल गिरफ्तार (photo Patrika)
Arun Pannalal Controversy: रायपुर पुलिस ने क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार कर लिया है। भगवान शिव को लेकर इंटरनेट मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राजधानी में माहौल गरमा गया। शुक्रवार देर रात बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पन्नालाल के आवास के बाहर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत इंटरनेट मीडिया पर सामने आई एक पोस्ट से हुई। इसमें हंसराज गोयल नामक व्यक्ति द्वारा भगवान शिव को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद इस पोस्ट पर क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की ओर से भी कथित तौर पर आपत्तिजनक कमेंट किए जाने का आरोप लगा। पोस्ट और कमेंट सामने आने के बाद मामला तेजी से इंटरनेट मीडिया पर फैल गया और इसके बाद धार्मिक संगठनों में आक्रोश देखने को मिला।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को इंटरनेट मीडिया पर भगवान शिव को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते संबंधित पोस्ट और उसके कमेंट्स की तस्वीरें और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने लगे। मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। आक्रोशित कार्यकर्ता देर रात अरुण पन्नालाल के घर के बाहर पहुंच गए। मौके पर बजरंग दल समेत अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों की भीड़ जुट गई। कार्यकर्ताओं ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विरोध जताते हुए कार्रवाई की मांग की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस को तत्काल सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।
अरुण पन्नालाल के आवास के बाहर देर रात प्रदर्शन की स्थिति बनने के बाद पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े किसी भी मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट और कमेंट्स की जांच शुरू की गई। जांच के बाद पुलिस ने अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की तकनीकी जांच कर रही है। अधिकारियों की नजर संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, कमेंट्स, अकाउंट्स और उनके प्रसार पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवादित सामग्री सबसे पहले किस अकाउंट से सामने आई और इसके बाद किन-किन लोगों ने इसे साझा या प्रसारित किया। जांच के दौरान पोस्ट की तारीख, समय, मूल अकाउंट और संबंधित कमेंट्स की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित टिप्पणी किस संदर्भ में की गई थी और पूरे मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि धार्मिक और संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी किसी भी सामग्री को बिना सत्यापन के साझा न करें। पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने से भी बचने की अपील की है।
अरुण पन्नालाल इससे पहले भी सोशल मीडिया से जुड़े एक विवाद को लेकर चर्चा में रहे हैं। मई 2025 में उनके खिलाफ रायपुर के आजाद चौक थाने में अफवाह फैलाने और सोशल मीडिया पर गलत कंटेंट वायरल करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। यह मामला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा था। आरोप था कि पन्नालाल ने सोशल मीडिया पर हमले में मारे गए लोगों की सूची से संबंधित गलत जानकारी पोस्ट की थी। इस सूची में रायपुर के रहने वाले दिनेश मिरानिया का नाम भी शामिल था। इसके बाद दिनेश मिरानिया के परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अरुण पन्नालाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
विवाद बढ़ने के बाद अरुण पन्नालाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई भी दी थी। उन्होंने अपनी पोस्ट को लेकर माफी मांगते हुए कहा था कि असावधानी के कारण उनका एक फेसबुक पोस्ट उनके विचारों के विपरीत प्रतीत हो रहा था और वह स्वयं उस विचार से सहमत नहीं थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि गलतफहमी को दूर कर लिया गया है और आहत परिवार ने उनकी माफी स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही उन्होंने विवादित पोस्ट को डिलीट करने की बात कही थी। अब एक बार फिर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर उनका नाम सामने आया है और इस बार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस सोशल मीडिया पर सामने आए कंटेंट को साक्ष्य के तौर पर जांच रही है। मामले में पोस्ट और कमेंट के वास्तविक संदर्भ, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामले को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री पोस्ट अथवा शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Updated on:
08 Aug 2026 01:01 pm
Published on:
08 Aug 2026 12:59 pm
