
Aishwarya Nishad Artist@Khyati parihar: हाथों में रंगों की कूची, आंखों में कला का खूबसूरत संसार और उंगलियों में ऐसा जादू कि कैनवास पर बनी बजरंगबली की तस्वीर भी जीवंत नजर आए। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के युवा कलाकार ऐश्वर्य निषाद की, जिनकी 3D आर्ट और पेंटिंग आज सोशल मीडिया के जरिए देश-विदेश तक पहचान बना चुकी है। बिना किसी गुरु के, सिर्फ मेहनत और लगन के दम पर कला की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ऐश्वर्य ने अपनी संघर्षभरी यात्रा और भविष्य के सपनों को हमारे साथ साझा किया।
उत्तर: (मुस्कुराते हुए) सच कहूं तो मुझे अपने बचपन की ज्यादा बातें याद नहीं हैं। मेरी मां बताती हैं कि जब मैं बहुत छोटा था, तब मुझे कलम और चॉक दे देती थीं। मैं दिनभर दीवारों और जमीन पर कुछ न कुछ बनाता रहता था। बचपन में ज्यादातर बच्चे ऐसा करते हैं, लेकिन मुझे माता-पिता का पूरा सहयोग मिला।
जहां तक बिना गुरु के सीखने की बात है, यह रास्ता आसान नहीं था। कला सीखने में मार्गदर्शन बहुत जरूरी होता है। आजकल गुरु कला तो सिखा देते हैं, लेकिन उसे करियर में कैसे बदलना है, यह बहुत कम लोग बताते हैं। मैंने अपनी मेहनत और अनुभव से खुद को तैयार किया है।
उत्तर: मैं 12वीं कक्षा से पहले ही काम करना चाहता था, लेकिन कम उम्र होने के कारण कोई काम नहीं देता था। लोग कहते थे कि यह बाल श्रम माना जाएगा। शुरुआत में उम्र सबसे बड़ी बाधा बनी, लेकिन 12वीं पास करने के बाद मैंने पूरी तरह इस क्षेत्र में काम शुरू किया। शुरुआती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन आज सब कुछ धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उत्तर: आज सोशल मीडिया कलाकारों के लिए सबसे बड़ा मंच है। इसके माध्यम से हमारी कला उन लोगों तक पहुंचती है, जो वास्तव में कला को पसंद करते हैं। मुझे सोशल मीडिया पर लोगों का भरपूर प्यार और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है। मेरी लगभग 65 प्रतिशत पेंटिंग सोशल मीडिया के जरिए बिकती हैं। बाकी काम कला प्रदर्शनियों और पुराने ग्राहकों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचता है। साल 2022 में मैंने अपने पिता के अखाड़े में बजरंगबली की पहली पेंटिंग बनाई थी। लोगों ने उसे खूब सराहा। उसी पेंटिंग को देखकर मुझे एक जिम में काम मिला और वहीं से मेरी पहचान बनने का सफर शुरू हुआ।
उत्तर: इसका पूरा आधार इल्यूजन (दृष्टिभ्रम) की तकनीक है। कोशिश यही रहती है कि देखने वाले को ऐसा लगे जैसे चित्र का पात्र कैनवास को चीरकर बाहर आ रहा हो। इसके लिए गहराई (डेप्थ) और हाइलाइट का संतुलन सबसे ज्यादा जरूरी होता है। जब यह संतुलन सही बैठ जाता है, तब पेंटिंग जीवंत दिखाई देती है।
ऐश्वर्य बताते हैं कि उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में टैटू बनाना सीखा और आज तक वे 1000 से अधिक लोगों के टैटू बना चुके हैं।
प्रश्न: आपके स्टूडियो 'स्टार आर्ट गैलेक्सी' का सपना क्या है? आने वाले वर्षों में खुद को कहां देखते हैं?
उत्तर: 'स्टार आर्ट गैलेक्सी' का मतलब मेरे लिए कला का ब्रह्मांड है। मेरा सपना है कि मैं सिर्फ एक-दो कला विधाओं तक सीमित न रहूं, बल्कि एक ही मंच पर हजारों तरह की कलाओं को जगह दूं। अभी मैं टैटू और ग्लिटर आर्ट करता हूं। आगे चलकर पिछवाई, मंडला, ग्राफिटी जैसी कई कला शैलियों को भी इसमें शामिल करना चाहता हूं। चाहे पांच साल लगें या दस, मैं यह सपना जरूर पूरा करूंगा।
उत्तर: जब कोई बड़ा प्रोजेक्ट होता है और समय कम होता है, तब मेरे चाचा, माता-पिता और भाई-बहन भी मेरे साथ मिलकर काम करते हैं। परिवार के सहयोग के बिना यह सफर संभव नहीं था।
उत्तर: मेरी पेंटिंग्स दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और गुजरात तक पहुंच चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, बस्तर सहित कई जिलों में भी मेरे काम की पहचान है।
उत्तर: मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि संसाधनों की कमी हर किसी के जीवन में होती है, लेकिन मेहनत करना कभी मत छोड़िए। अगर आप ईमानदारी से अपने हुनर पर काम करते रहेंगे, तो एक न एक दिन दुनिया आपकी कला और आपकी मेहनत को जरूर पहचान देगी।