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Health of the Nation 2026 Report: कौन सी साइलेंट बीमारी आपके शरीर को बना रही खोखला, जानिए डॉक्टर से बचाव के तरीके

Health of the Nation 2026 Report: अपोलो की नई रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 10 कामकाजी में से 8 मोटापे के शिकार हैं। 30 वर्ष से कम उम्र के 5 युवाओं में से एक युवा प्रीडायबिटिक हैं। इस खतरे से कैसे बच सकते हैं? इस बारे में डॉक्टर से विस्तार से समझिए

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Apr 09, 2026
भारत में तेजी से बढ़ रही है गैर-संचारी बीमारियां (Photo: IANS)

Health of the Nation 2026 Report : भारत में स्वास्थ्य संकट अब संचारी नहीं बल्कि गैर-संचारी रोगों (Non Communicable Diseases) के तेजी से बढ़ने से प्रकट हो रहा है। दो दशक पहले तक यह माना जाता था​ कि बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ लगती जाती हैं। लेकिन, अब बीमारियां कम उम्र में ही लोगों के जीवन को बेहद नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही हैं। इसका खतरनाक पहलू यह है कि गैर-संचारी रोग (फैटी लीवर, हाइपरटेंशन, हाइपरटेंशन आदि) बिना किसी शोर शराबे के बगैर यानी मौन रूप में घर-घर दस्तक दे रही है। भविष्य की इस खतरनाक महामारी पर अपोलो अस्पताल की नई रिपोर्ट मुहर लगाती हुई जान पड़ती है। आइए जानते हैं क्या कहती है रिपोर्ट? इनसे बचाव के लिए डॉक्टर क्या कहते हैं, यह भी जानते हैं।

अपोलो अस्पताल की हेल्थ ऑफ द नेशन 2026 रिपोर्ट (Apollo Health of the Nation 2026 Report) के अनुसार, भारत के 10 में से 8 कामकाजी लोग ओवरवेट हैं और बड़ी संख्या में लोग ऐसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनका उन्हें अभी तक पता भी नहीं है।

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हर पांच में से एक युवा प्रीडायबिटीक

रिपोर्ट बताती है कि भारत में स्वास्थ्य जोखिम अब पहले से कहीं ज्यादा जल्दी यानी कम उम्र में सामने आ रहे हैं। 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी प्रीडायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हर 5 में से 1 युवा प्रीडायबिटिक है। चिंताजनक बात यह है कि ये स्थितियां शुरुआती दौर में बिना किसी लक्षण के होती हैं, जिसे लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

कामकाजी वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि कामकाजी आबादी में स्थिति और भी गंभीर है। औसतन 38 वर्ष की उम्र वाले इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।

  • 10 में से 8 लोग ओवरवेट हैं
  • लगभग आधे को प्रीडायबिटीज या डायबिटीज है
  • हर 4 में से 1 व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त है
  • बगैर किसी लक्षण के शरीर को लग रहा है रोग
  • इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़ी संख्या में बीमारियां “साइलेंट” यानी बिना लक्षण के विकसित हो रही हैं।
  • 74% फैटी लिवर के मरीजों में सामान्य ब्लड टेस्ट में कोई असामान्यता नहीं दिखी, केवल अल्ट्रासाउंड से ही बीमारी का पता चला
  • 1,100 से अधिक बिना लक्षण वाले लोगों में से 45% में दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा पाया गया

युवाओं में बढ़ रहा इन रोगों का खतरा

शिशु रोग और फैमिली फिजिशियन डॉ. चंद्रशेखर झा ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भारत में उभरते स्वास्थ्य के जो आंकड़ें हैं, यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि अब मेटाबॉलिक रोगों का बोझ कम उम्र में बढ़ रहा है और यह सब बहुत गुपचुप तरीके से बढ़ रहा है। कम उम्र में और मौन रूप में, और यह खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है। अपोलो अस्पताल की हेल्थ ऑफ द नेशन 2026 (Apollo Health of the Nation 2026 Report) रिपोर्ट का सार है कि भारत में 10 में 8 कार्यरत लोग अधिक वजनी हैं। दो तिहाई युवाओं में गैर-संचारी रोग (Non Communicable Diseases) से पीड़ित हैं। उदाहरण के लिए युवाओं में मेटाबॉलिक फैटी लीवर, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। यहां तक कि युवाओं में विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी देखी जा रही है।

शरीर का वजन खतरनाक रोगों को देते हैं न्योता

उन्होंने कहा कि शरीर का वजन बढ़ना सबसे शुरुआती विकृति है। वजन बढ़ने के चलते डायबिटीज और हाइपर टेंशन होने के खतरे बढ़ जाते हैं। फैटी लिवर जिसको पहले नॉन अल्कोहोलिक फैटी लीवर बोलते थे, अब उसे मेटाबॉलिक फैटी लिवर कहा जाता है। फैटी लिवर और कोरोनरी कैल्सिफिकेशन यानी हृदय की रक्त वाहिकाओं में कैल्सिफिकेशन आजकल तेजी से बढ़ती ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो अक्सर बिना लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। अब इन बीमारियों में प्रारंभिक अवस्था में सिम्टम्स यानी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। अब सिम्टम्स बेस्ड अप्रोच अपर्याप्त है।

डायबिटीज और हाइपरटेंशन बन चुकी है महामारी

उन्होंने बताया कि अब डायबिटीज में प्री का कॉन्सेप्ट यानी प्री डायबि​टीज, प्री हाइपरटेंशन पहले नहीं था। 20 से 30 वर्ष की कम उम्र में प्री डायबिटीज, प्री हाइपरटेंशन होने की वजह खराब फिटनेस और पोषण की कमी है। यह एक प्रारंभिक महामारी (early epidemiological shift) संबंधी बदलाव है। ये गैर-संचारी रोग महामारी की तरह देश में पसर चुका है। ऐसा नहीं है कि लक्षण नहीं है तो बीमारी नहीं है।

कौन सी जांच आपको करानी चाहिए?

डॉ. झा ने कहा कि हमें इन रोगों से बचाव के लिए एक रणनीतिक योजना बनानी होगी। मेरा सुझाव है कि इनसे बचाव या नियंत्रण के लिए हमें शुरुआती तौर (early structured Screening) पर कुछ जांच कराना होगा- शरीर द्रव्यमान सूचकांक (Body Mass Index), लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile), ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c), विटामिन डी, विटामिन बी12 आदि।

जीवनशैली में बदलाव पहली थेरेपी

उन्होंने जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Modification) पर जोर देते हुए कहा कि इसे पहली थेरेपी मानना होगा। मतलब आपको सही भोजन, सही समय और सही मात्रा लेना होगा। शारीरिक गतिविधियों को तीन चरणों में बांटकर करना होगा— हृदय संबंधी व्यायाम (Cardio Exercise), वजन उठाने वाली कसरतें (Weight-bearing exercises) और शरीर के लचीलेपन (flexibility)। इसके साथ ही नियत समय पर सोने की आदत डालना। डिजिटल स्क्रीन टाइम को कम करना। मेरा मानना है कि आपको एकीकृत देखभाल मॉडल (integrated care model) अपनाना पड़ेगा। मेरे हिसाब से आपको शरीर के वजन को नियंत्रित रखना, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना, मेटाबॉलिक संतुलन बनाए रखना और समुचित नींद का सही तरीके से प्रबंधन करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यस्थल और युवाओं को इनसे बचाने के केंद्रित उपायों के बारे में सोचना होगा।

भारत में हेल्थकेयर की क्या है चुनौतियां?

उन्होंने कहा कि भारत में हेल्थकेयर की चुनौती रोग के इलाज की नहीं है बल्कि रोग के मौन और तीव्र गति से बढ़ने की है। इसकी सही समय पर पहचान और सही समय पर इलाज की है। ये रोग शुरुआती समय में रिवर्सल यानी ठीक हो सकते हैं। अगर इन गैर-संचारी रोगों डायबिटीज, हाइपरटेंशन व अन्य की समय से पहचान और उसकी रोकथाम को लेकर काम किया जाए तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।

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