
Ashit Chatterjee Actor: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जैसे शहर से निकलकर मुंबई की मायानगरी में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता आशित चटर्जी का अभिनय सफर संघर्ष, प्रशिक्षण और लगातार मेहनत की कहानी है। अलग-अलग फिल्मों और वेब सीरीज में चुनौतीपूर्ण किरदार निभा चुके आशित अब फिल्म ‘सेक्शन 84’ में महानायक अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।
आशित का मानना है कि कला के क्षेत्र में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अभिनय में पहचान बनाने के लिए प्रतिभा के साथ प्रशिक्षण, धैर्य और लगातार अभ्यास जरूरी है। राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे आशित ने अपने अभिनय सफर, थिएटर, संघर्ष और मुंबई में बिताए अनुभवों को साझा किया।
आशित बताते हैं कि बचपन से ही उनका झुकाव कला की ओर रहा। अभिनय में आने से पहले उन्होंने ड्राइंग और चित्रकारी में रुचि ली। वह चित्र बनाया करते थे और कला से जुड़े अलग-अलग माध्यमों को समझने की कोशिश करते थे।
उस समय बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों में कला और अभिनय के क्षेत्र में अवसर आज की तुलना में सीमित थे। बड़े मंच और बेहतर अवसरों के लिए युवाओं को मुंबई, दिल्ली या कोलकाता जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। आशित के लिए भी आगे बढ़ने की चाह उन्हें बड़े शहर की ओर ले गई।
अभिनय को करियर बनाने से पहले आशित ने पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बीकॉम और डीबीएम की शिक्षा हासिल की। इसके बाद बिलासपुर में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की। नौकरी से उन्हें आर्थिक स्थिरता और संतुष्टि तो मिल रही थी, लेकिन अंदर से वह अपने काम को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। अभिनय और कला के प्रति उनका लगाव लगातार बना हुआ था। इसी दौरान उन्होंने खुद से सवाल किया कि अगर उन्होंने मन का काम नहीं किया तो आगे चलकर उन्हें इसका पछतावा हो सकता है। यही सोच उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनी।
आशित ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर अभिनय को अपना करियर बनाने का फैसला किया। इसके बाद वह मुंबई पहुंचे और वहां शून्य से शुरुआत की। मुंबई जैसे शहर में पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआती दौर में संघर्ष किया और कुछ लोगों के साथ कमरा साझा कर भी समय बिताया। लेकिन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अभिनय सीखने और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। उनके लिए मुंबई सिर्फ अवसरों का शहर नहीं था, बल्कि खुद को साबित करने की लगातार परीक्षा भी थी।
आशित ने अभिनय सीखने के लिए थिएटर का रास्ता चुना। उनके मुताबिक थिएटर ने उन्हें अभिनय की बारीकियों को समझने और अलग-अलग किरदारों में खुद को ढालने का अवसर दिया। उनका मानना है कि पर्दे पर किसी दूसरे व्यक्ति का किरदार निभाना जितना आसान दिखाई देता है, वास्तव में उतना ही चुनौतीपूर्ण है। किसी किरदार को विश्वसनीय बनाने के लिए उसकी मानसिकता, व्यवहार, बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज को समझना पड़ता है। थिएटर ने उन्हें यही अनुशासन सिखाया। मंच पर लगातार अभिनय करने से संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और किरदार को समझने की क्षमता विकसित हुई।
आशित ने फिल्मों और वेब सीरीज में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। फिल्म ‘रोमियो अकबर वाल्टर’ में उन्होंने आईएसआई चीफ की भूमिका निभाई। यह किरदार उनके अभिनय सफर में महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इस भूमिका के लिए उन्हें एक गंभीर और प्रभावशाली व्यक्तित्व को पर्दे पर प्रस्तुत करना था। अलग-अलग किरदारों को निभाने की उनकी क्षमता ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाने में मदद की।
वेब सीरीज ‘द एम्पायर’ में आशित ने इब्राहिम लोदी की भूमिका निभाई। ऐतिहासिक किरदार को निभाने के लिए उन्होंने उसके व्यक्तित्व और शारीरिक हाव-भाव पर काम किया। आशित बताते हैं कि हर किरदार अपने साथ अलग चुनौती लेकर आता है। किसी किरदार की उम्र, व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि के अनुसार कलाकार को अपने लुक और बॉडी लैंग्वेज में बदलाव करना पड़ता है।
आशित ने ‘कर्म युद्ध’ में नक्सल नेता कानू सुदर्शन की भूमिका भी निभाई। यह किरदार भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसके लिए उन्हें एक अलग तरह के व्यक्तित्व को समझना और पर्दे पर उतारना था। अलग-अलग उम्र और स्वभाव के किरदारों को निभाते हुए आशित ने अपने लुक, आवाज और बॉडी लैंग्वेज पर विशेष रूप से काम किया। यही विविधता उनके अभिनय सफर की खासियत बनती जा रही है।
आशित के अभिनय करियर में अब एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। वह फिल्म ‘सेक्शन 84’ में महानायक अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए आशित कहते हैं कि अमिताभ बच्चन अपने आप में एक पूरा संस्थान हैं। उनके मुताबिक महानायक की समय की पाबंदी, प्रोफेशनलिज्म और अभिनय के प्रति समर्पण हर कलाकार के लिए सीखने योग्य है। एक अनुभवी अभिनेता के साथ काम करना उनके लिए केवल एक प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं, बल्कि अभिनय को और करीब से समझने का अवसर भी रहा।
मुंबई में अपने संघर्ष के बारे में आशित कहते हैं कि संघर्ष किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह हर किसी के जीवन का हिस्सा है। फर्क सिर्फ इतना है कि समय के साथ संघर्ष का स्तर बदलता रहता है। उनका कहना है कि मुंबई आने के बाद उन्होंने भी सामान्य संघर्षों का सामना किया। लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों को अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। लगातार काम करते रहना और सीखते रहना ही उनके लिए आगे बढ़ने का रास्ता रहा।
युवा कलाकारों के लिए आशित का संदेश बेहद स्पष्ट है। उनका कहना है कि अपने काम के प्रति ईमानदार रहें, धैर्य रखें और लगातार रियाज करते रहें। उनके मुताबिक किसी भी क्षेत्र में रातोंरात सफलता नहीं मिलती। प्रतिभा को सही दिशा देने के लिए प्रशिक्षण और मेहनत जरूरी है। गुरु रास्ता दिखा सकता है, लेकिन उस रास्ते पर चलने की मेहनत व्यक्ति को खुद करनी पड़ती है। “गुरु रास्ता दिखा सकता है, लेकिन मेहनत आपको खुद करनी होगी।”
बिलासपुर से शुरू हुआ आशित चटर्जी का सफर आज मुंबई के बड़े प्रोजेक्ट्स तक पहुंच चुका है। कॉरपोरेट नौकरी से अभिनय की दुनिया में कदम रखना आसान फैसला नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने मन की आवाज को प्राथमिकता दी। थिएटर से मिली सीख, संघर्ष के अनुभव और अलग-अलग किरदारों को निभाने की चुनौती ने उनके अभिनय को लगातार निखारा है। अब ‘सेक्शन 84’ में अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर करना उनके करियर की एक नई उपलब्धि है। आशित का सफर उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सुरक्षित रास्ते से अलग अपने जुनून को करियर बनाना चाहते हैं।