
रायपुर@ताबीर हुसैन। Chhattisgarh Choreographer: माइकल जैक्सन की पुण्यतिथि पर दुनिया 'किंग ऑफ पॉप' को याद कर रही है। वहीं रायपुर में भी ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने डांस को केवल कला नहीं, बल्कि अपने जीवन का आधार बना लिया। कभी चित्रहार देखकर स्टेप्स सीखने वाले ये कलाकार आज क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
वर्षों की मेहनत, लगातार सीखने की ललक और मंच से फिल्मों तक के सफर ने उन्हें खास मुकाम दिलाया है। किसी ने डांस के जरिए अपना परिवार संवारा तो किसी ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य और आधुनिक शैली का संगम कर नई पहचान बनाई। ये कलाकार अपनी लय और रचनात्मकता से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं।
कोरियोग्राफर चंदनदीप बताते हैं कि बचपन से ही डांस उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। चित्रहार में फिल्मी कलाकारों को देखकर उनके स्टेप्स दोहराना, स्कूल और गणेश उत्सवों में प्रस्तुतियां देना और हर मंच पर खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उस दौर में ब्रेक डांस करने वाले कलाकारों को खास पहचान मिलती थी और वे वीसीआर पर प्रभुदेवा तथा माइकल जैक्सन को देखकर नए डांस स्टेप्स सीखने का प्रयास करते थे।
चंदनदीप बताते हैं कि लोककला मंच, ऑर्केस्ट्रा, नुक्कड़ कार्यक्रम, स्टेज शो और फिल्मों तक हर जगह उन्हें सीखने और खुद को निखारने का अवसर मिला। बैकअप डांसर के रूप में शुरू हुआ उनका सफर आज 23 वर्षों के कोरियोग्राफी अनुभव तक पहुंच चुका है। उनका मानना है कि किसी भी कोरियोग्राफर की सबसे बड़ी पहचान उसकी मिट्टी और संस्कृति होती है। जिस क्षेत्र के लिए काम किया जाए, वहां की लोक-संस्कृति की झलक उसकी प्रस्तुति में जरूर दिखनी चाहिए।
कोरियोग्राफर एनटीआर (नंदू तांडी) का मानना है कि रीजनल फिल्मों में डांस का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां बॉलीवुड की शैली का प्रभाव अधिक दिखाई देता था, वहीं अब स्थानीय पहचान और मौलिकता को महत्व दिया जा रहा है। उनके अनुसार आज डांस केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि कहानी कहने का सशक्त जरिया बन चुका है।
वे बताते हैं कि दर्शकों को लोकनृत्य और आधुनिक डांस का फ्यूजन सबसे अधिक पसंद आ रहा है। करमा, पंथी और सुआ जैसे पारंपरिक नृत्यों को आधुनिक संगीत और प्रस्तुति शैली के साथ मंचित करने से नई पीढ़ी भी संस्कृति से जुड़ रही है और लोककलाएं भी जीवंत बनी हुई हैं।
नंदू तांडी को विश्वास है कि आने वाले वर्षों में रीजनल सिनेमा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। उनका मानना है कि छत्तीसगढ़ी डांस सीक्वेंस किसी भी बड़ी फिल्म इंडस्ट्री को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। वे कहते हैं कि प्रदेश के कलाकारों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही अवसर और मंच की है।
दुनियाभर में 'किंग ऑफ पॉप' के नाम से मशहूर माइकल जैक्सन की पुण्यतिथि हर साल 25 जून को मनाई जाती है। उनका निधन 25 जून 2009 को अमेरिका के लॉस एंजिल्स में हुआ था। संगीत और नृत्य की दुनिया में उनका योगदान आज भी कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
आज के दौर में जब युवा तेजी से बदलते ट्रेंड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे में स्थानीय कला और संस्कृति को नए स्वरूप में प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती है। ऐसे कलाकार न केवल मनोरंजन के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उनकी कोशिशें यह दिखाती हैं कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं। यही प्रयास भविष्य में छत्तीसगढ़ी कला और फिल्म इंडस्ट्री को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।